वर्ष मेें 100 दिन तक मजदूरी करने वाले मनरेगा श्रमिकों को प्रोजेक्ट लाइफ के तहत कौशल विकास का प्रशिक्षण देकर स्वावलंबी बनाया जाएगा। शासन से इसका निर्देश मिलने पर ब्लाक के माध्यम से श्रमिकों का चयन शुरू कर दिया गया है।
गांव से पलायन रोकने के लिए मनरेगा के माध्यम से श्रमिकों को काम दिया जा रहा था। इसमें तमाम ऐसे श्रमिकों को लाभ मिला है, जो केवल मजदूरी पर ही आश्रित थे। अब इन श्रमिकों का जीवन स्तर उठाने के लिए उन्हें किसी हस्तशिल्प से जोड़ा जाएगा। इसमें ऐसे श्रमिकों को प्राथमिकता दी जाएगी जो गांव में मनरेगा के तहत कम से कम 100 दिन मजदूरी करते हैं। शासन का मानना है कि 100 दिन या इससे अधिक मजदूरी करने वालों के पास आजीविका का कोई साधन नहीं होता है और उन्हें स्थाई रोजगार की आवश्यकता है। इसके लिए अब ऐसे श्रमिकों को चिह्नित कर कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जाना है।
शासन से इसका आदेश प्रशासन को प्राप्त हो गया है। इसके अनुसार श्रमिकों को उनकी रूचि के अनुसार मकान निर्माण, वेल्डिंग, बिजली फिटिंग, फर्नीचर निर्माण, सब्जी उत्पादन आदि के कार्य का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
ब्लाक के माध्यम से होगा चयन
प्रोजेक्ट लाइफ योजना के तहत कौशल विकास का प्रशिक्षण देने के लिए श्रमिकों का चयन ब्लाक स्तर से किया जा रहा है। इसके लिए बीडीओ, वीडीओ, रोजगार सेवक को निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इच्छुक श्रमिकों का चयन कर सूची शासन को भेजा जाएगी।
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प्रोजेक्ट लाइफ योजना से मनरेगा श्रमिकों को स्वावलंबी बनाया जाएगा। इसके लिए ब्लाक के माध्यम से श्रमिकों का चयन हो रहा है। इससे जरूरतमंद श्रमिकों को लाभ मिलेगा।
- डॉ. शिवाकांत द्विवेदी, उपायुक्त मनरेगा