किसान विजयपाल की आत्महत्या के मामले में पुलिस जहां कर्ज का दबाव बढ़ने और उससे हुए अवसाद को कारण मान रही है वहीं प्रशासन कर्ज के अवसाद को नकार कर आत्महत्या का कारण घरेलू विवाद मान रहा है। तहसीलदार का कहना है कि विजयपाल की घर में किसी से कहासुनी हो गई थी और उसने नाराज होकर आत्महत्या कर ली।
कर्ज में डूबे शहबाजपुर के किसान विजयपाल ने शुक्रवार की देर रात घर में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या की सूचना पर तहसीलदार नन्हेलाल ने क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक लेखराज शर्मा और लेखपाल अनूप शर्मा को मौके पर जांच के लिए भेजा। तहसीलदार ने बताया कि राजस्व कर्मियों ने अपनी जांच रिपोर्ट सौैंप दी है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक विजयपाल ने कर्ज को लेकर आत्महत्या नहीं की। उसकी घरवालों से किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई थी। इससे नाराज होकर उसने गोली मारकर आत्महत्या कर ली। तहसीलदार से जब यह पूछा गया कि किस बात को लेकर मृतक से घर के किस सदस्य से विवाद हुआ तो तहसीलदार चुप्पी साध गए। वहीं हलका दरोगा भरत सिंह का कहना है कि प्रथम दृष्ट्या जांच में साफ हो गया है कि विजयपाल ने कर्ज की वजह से आत्महत्या की है। हालांकि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।
आत्महत्या थी, इसलिए पुलिस रात में नहीं पहुंची
पीलीभीत। आत्महत्या पुलिस के लिए बड़ा मामला नहीं है। विजयपाल की आत्महत्या की सूचना उनके भतीजे ने थाने में रात एक बजे जाकर खुद दी लेकिन पुलिस नहीं पहुंची। इस संबंध में जब एसएचओ से बात की गई तो उनका कहना था कि रात में कोई सूचना देने आया ही नहीं था। हमें सुबह सूचना मिली तब हम मौके पर गए। वहीं, मौका मुआयना करने एडिशनल एसपी विकास कुमार वैद्य का कहना है कि दो बजे मोबाइल पर सूचना आई थी। फोन करने वाले आत्महत्या की बात बताई और और रात में फोर्स अलग-अलग स्थानों पर ड्यूटी पर लगी थी, इसलिए मौके पर नहीं पहुंच पाई। मौके पर जाकर मैने परिवार और आसपास के लोगों से बातचीत की है। किसान पर कर्ज था लेकिन उसने आत्महत्या क्यों की इसकी जांच कराई जा रही है। मृतक के भतीजे ने आत्महत्या की तहरीर पुलिस को दी है। जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
समय पर टर्नओवर करता था किसान
बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक बरसिया के मैनेजर रक्षपाल ने बताया कि विजयपाल उनका नियमित बार ओवर था, जो हर वर्ष ऋण लेता था और सही समय पर ऋण की अदायगी करता था। परिवारवालों का कहना है कि इस बार समय पर पैसा जमा करने की स्थिति नहीं बन रही थी इसलिए विजयपाल लगातार अवसाद में रहते थे।