फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पीलीभीत में तीन किसानों की मौत

Thu, 23 Apr 2015 11:21 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला पीलीभीत
विज्ञापन
विज्ञापन
घटना: एक
विज्ञापन

पीलीभीत। शहर के सुनगढ़ी थाना अंर्तगत आने वाले ग्राम रंपरिया सिरसा निवासी सालिगराम (50) पुत्र गोकुल प्रसाद की मंगलवार रात अचानक हालत खराब हो गई। परिवार वाले उन्हें कहीं इलाज के लिए ले जाते कि इससे पहले बुधवार भोर में हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई।
मृतक के बड़े पुत्र 25 वर्षीय भगवानदास ने  बताया कि उनके पिता ने चार बीघा जमीन में गेहूं बोया था। काफी मेहनत खेती में की थी। फसल के काफी बेहतर होने की उम्मीद थी, लेकिन बारिश व ओलावृष्टि ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।  मंगलवार को गेहूं की गहाई हुई तो कुल दो क्विंटल गेहूं निकला। परिवार वालों के मुताबिक इससे उन्हें खासा सदमा लगा। उसी दिन देर रात उनकी हालत अचानक खराब हो गई। परिवार वाले उन्हें कहीं ले जाने की तैयारी कर रहे थे कि बुधवार तड़के उनकी मौत हो गई। परिवार वालों ने बिना पुलिस व प्रशासन को सूचना दिए बगैर बुधवार को उनका अंतिम संस्कार कर दिया। मृतक किसान के भगवानदास के अलावा दो और पुत्र शिवकुमार (18) व महेंद्रपाल (17) हैं। गांव के पूर्व प्रधान धनीराम ने बताया कि भगवानदास इधर कुछ दिनों से गरीबी के चलते परेशान भी रहता था। खेत में कम फसल निकलने के बाद वह काफी दुखी लग रहा था। उन्होंने बताया कि गांव में एक तो राजस्वकर्मियों ने ठीक से सर्वे नहीं किया दूसरा जिनका सर्वे हो चुका है उन्हें भी अब तक कोई सहायता नहीं मिली है।
विज्ञापन


घटना: दो
कथित फसल नुकसान से गई वृद्ध किसान की जान
बीसलपुर। गांव सोंधा गौटिया निवासी किसान बलविंदर सिंह का बुधवार की शाम दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है। घर वालों ने फसल नुकसान के गम में उनकी मौत होने का दावा किया है।
गांव सोंधा गौटिया निवासी बलवीर कौर ने बताया कि उनके पति 62 वर्षीय बलविंदर सिंह के पास 16 एकड़ जमीन है। सारी जमीन में गेहूं की फसल थी, जो ओला और अतिवृष्टि में पूरी तरह से बर्बाद हो गई थी। जिसका उन्हें काफी गहरा सदमा लगा। फसली क्षति की सूचना तहसील कार्यालय में बिल्कुल सही समय पर दे दी गई थी, लेकिन राजस्व विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों ने अभी तक नुकसान का आंकलन नहीं किया, जिससे मुआवजा मिलने के आसार क्षीण हो गए। बुधवार की शाम उनका दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। बलवीर कौर का कहना है कि उनका निधन फसली नुकसान के गम में हुआ है। सूचना मिलने पर उनके अधिकांश रिश्तेदार भी पहुंच गए थे।  बृहस्पतिवार को गमगीन वातावरण में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस घटना से घर में कोहराम मच गया है। मृतक की पत्नी बलवीर कौर, पुत्र केवल सिंह, कुलवंत सिंह, गुरदयाल सिंह और जसवीर सिंह का रोते रोते बुरा हाल हो रहा है।

फसली नुकसान के गम में नहीं हुई मौत
तहसीलदार नन्हे लाल ने बताया कि बलविंदर सिंह की मौत फसली नुकसान के गम में नहीं हुई है, बल्कि बीमारी के चलते हुई है। उन्होंने कहा कि सभी प्रभावित खेतों का सर्वे किया जा रहा है और नुकसान के हिसाब से किसानों को मुआवजा दिया जा रहा है।
एक और किसान की इलाज के दौरान मौत
चुर्रासकतपुर। गांव भैसटा जलालपुर के किसीन विजेंद्र सिंह (65) की गुरुवार को संदिग्ध परिस्थिति में इलाज के दौरान बरेली के एक निजी अस्पताल में मौत हो गई। परिवार वालों का दावा है कि 14 अप्रैल को फसल क्षति के गम में किसान ने छत से कूदकर आत्महत्या करने का प्रयास किया था। गंभीर अवस्था में उसे बरेली के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
विज्ञापन

गांव भैसटा जलालपुर निवासी रामबेटी ने बताया कि उनके पति विजेंद्र सिंह के पास 12 बीघा जमीन है। जिसमें गेहूं की फसल थी। जो ओला और अतिवृष्टि में पूरी तरह बर्बाद हो गई थी। उन्होंने दावा किया कि इसी गम मे 65 वर्षीय विजेंद्र  ने 14 अप्रैल को अपनी छत से कूदकर आत्महत्या करने का प्रयास किया था। सिर में काफी चोट आ जाने के कारण उन्हें बरेली के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां बृहस्पतिवार को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। शव आते ही घर मे कोहराम मच गया। दोपहर बाद गमगीन वातावरण में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मृतक की पत्नी और एकमात्र पुत्र सत्येंद्र और पुत्री सुधा का रोते-रोेते बुरा हाल हो रहा है। सूचना मिलने पर बरेली जिले की फरीदपुर तहसील कार्यालय की राजस्व टीम ने उनके खेत पर पहुंचकर फसली नुकसान का जायजा लिया और मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। दरअसल विजेंद्र की जमीन बरेली जिले के गांव शेखापुर और अमृती में है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें