श्रीरामलीला मेला कमेटी के अध्यक्ष एवं अधिवक्ता कुलदीप सक्सेना ने सोमवार तड़के जहर खाकर खुदकुशी कर ली। उनकी पत्नी रश्मि ने मेला बचाओ संघर्ष समिति के सदस्य और प्रगतिशील अधिवक्ता एसोसिएशन के दो पूर्व अध्यक्ष राजेश्वर मिश्र, रजनीश सक्सेना, वकील विष्णु वर्मा और नगर पालिका सदस्य आदित्य मोहन और मेला बचाओ संघर्ष समिति के अन्य सदस्यों के खिलाफ आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का आरोप लगाया है। पुलिस ने रश्मि की ओर से उक्त लोगों के खिलाफ आत्महत्या को प्रेरित करने की रिपोर्ट दर्ज कर ली है। सीओ राजेश्वर सिंह, प्रभारी कोतवाल राजेश यादव ने घटना स्थल का निरीक्षण कर लोगों से पूछताछ की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेजा है।
घटना सोमवार सुबह करीब पौने छह बजे की है। कुलदीप सक्सेना के भाई कृष्ण स्वरूप सक्सेना ने बताया कि कुलदीप कई दिनों से मेला बचाओ संघर्ष समिति के सदस्यों की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को लेकर परेशान थे। आज सोमवार को भी सुबह पांच बजे जागने के बाद गली में घूमते रहे। साढ़े पांच बजे घर पहुंचे। करीब छह बजे उन्होंने जहरीला पदार्थ खाने की जानकारी अपनी पत्नी रश्मि को दी। कुछ ही देर में कुलदीप की हालत बिगड़ गई। गंभीर हालत में उनको नगर के एक प्राइवेट अस्पताल में ले जाया गया। चिकित्सक ने उनको बाहर ले जाने की सलाह दी। कुलदीप को पीलीभीत ले जाया जा रहा था कि रास्ते में उनकी मौत हो गई। कुलदीप सक्सेना की मौत पर उनके परिवार वालों में कोहराम मच गया। सूचना पर सीओ राजेश्वर सिंह, प्रभारी कोतवाल राजेश यादव ने उनके घर पहुंचकर परिवार वालों से घटना की जानकारी की। पुलिस ने रश्मि सक्सेना की तहरीर पर मेला बचाओ संघर्ष समिति के सदस्य और प्रगतिशील अधिवक्ता एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राजेश्वर मिश्र, रजनीश सक्सेना, वकील विष्णु वर्मा, वकील और नगर पालिका सदस्य आदित्य मोहन के खिलाफ आत्महत्या को प्रेरित करने की रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेजा है। प्रभारी कोतवाल राजेश यादव ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम पैनल से कराने की संस्तुति की गई है।
भाईयों में छोटे थे कुलदीप
कुलदीप सक्सेना पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। उनके सबसे बड़े भाई शांती स्वरूप सक्सेना की कई साल पहले मौत हो गई थी। उनसे छोटे कृष्ण स्वरूप सक्सेना कातिब हैं। बहनों में मुन्नी देवी की बरेली और मीरा सक्सेना की पूरनपुर में शादी हुई है। मीरा सक्सेना भी वकील हैं। कुलदीप सक्सेना के परिवार मेें पत्नी रश्मि सक्सेना के अलावा 18 वर्षीय पुत्री जुल्फी सक्सेना, 16 वर्षीय पुत्र रचित, 14 वर्षीय पुत्र कुश है।
दो साल पहले संभाली थी मेला की कमान
कुलदीप सक्सेना का सालों से मेला कमेटी को सहयोग मिल रहा था। हालांकि करीब दो साल पहले उन्होंने मेला कमेटी की कमान संभाली थी और अध्यक्ष बने थे।
बदनाम कर रहे थे आरोपी, इसलिए पति ने की खुदकुशी
पूरनपुर। मृतक की पत्नी रश्मि ने बताया कि पिछले एक साल से रजनीश कुमार सक्सेना, राजेश्वर मिश्र, आदित्य मोहन, विष्णु कुमार वर्मा और अन्य सदस्यों ने एक मेला बचाओ संघर्ष समिति बनाई थी। उनके पति पर संघर्ष समिति के बैनर से झूठे आरोप लगाए गए और रजिस्ट्रार सोसायटी चिट्स एंड फंड बरेली में झूठी शिकायत की गई। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में भी जनहित याचिका के माध्यम से प्रताड़ित किया गया। न्यायालय सीजेएम पीलीभीत में 156/3 से गबन का मुकदमा लिखवाने के लिए वाद योजित किया गया। आरोप है कि उक्त लोग पूरनपुर में जगह-जगह कहते थे कि उसके पति को जेल भिजवाया जाएगा। समाज में भी कहते घूम रहे थे कि कुलदीप चोर हैं। दर्ज रिपोर्ट में कहा गया है कि एक मई को भी उक्त लोगों ने नारेबाजी की, मीटिंग की। रिपोर्ट में कहा गया है कि उसके पति अक्सर कहते थे कि उपरोक्त लोगों के झूठे आरोपों से तंग आ गया हूं। किसी भी दिन आत्महत्या कर लूंगा, जिसकी सारी जिम्मेदारी उक्त लोगों की होगी। आखिरकार उनके पति ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली।
क्या कहते हैं आरोपी
मुकदमेबाजी को लेकर उनकी पहले से ही कुलदीप से रंजिश चल रही थी। रामलीला मेला मामले में कुलदीप सक्सेना मुख्य दोषी नहीं हैं। इस संबंध में उनकी उनसे बात भी हुई थी। वे मेला कमेटी से त्याग पत्र देना चाहते थे। कुछ अन्य लोगों ने रामलीला मेला की भूमि बिक्री कर मोटी रकम हड़प ली थी, ऐसे लोगों ने कुलदीप सक्सेना को त्याग पत्र नहीं देने दिया था। मुख्य दोषी तो मेला की भूमि की बिक्री करने वाले हैं।
- रजनीश सक्सेना, आरोपी
मैंने कोई प्रताड़ित नहीं किया। कुलदीप सक्सेना को छोटा भाई मानता था। मेला कमेटी के अन्य कुछ पदाधिकारियों ने अपने बचाव के लिए कुलदीप सक्सेना को मोहरा बना दिया। इसी की दहशत के चलते कुलदीप सक्सेना ने आत्महत्या की है।
- राजेश्वर मिश्र, आरोपी