फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पहले भी हो चुकी है पुलिस हिरासत में मौत 

Thu, 31 Mar 2016 11:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला पीलीभीत
विज्ञापन
विज्ञापन
पूरनपुर में पुलिस कस्टडी में दो युवकों के मारे जाने की यह कोई पहली वारदात नहीं। ढाई दशक पहले जहानाबाद पुलिस पर आरोप लगा था कि पुलिस ने दिलशाद उर्फ बाबू को इतना पीटा की उसकी मौत हो गई। इस मामले में तत्कालिक एसओ समेत 12 पुलिसकर्मी जेल गए थे।
विज्ञापन

 अगस्त 2004 में कोतवाली बीसलपुर के गांव सिमरा अकबरगंज निवासी रामेश्वर दयाल की पत्नी धर्मवती की पुलिस ने पिटाई की थी, जिससे उसकी मौत हो गई थी। इस घटना में दरोगा तेजवीर सिंह, सिपाही अमर सिंह व डोरीलाल को जेल जाना पड़ा था। 15 अगस्त 2010 में खाकी का क्रूर चेहरा एक बार फिर सामने आया। थाना बरखेड़ा के गांव जारकलिया निवासी रामपाल को करोड़ चौकी पुलिस एक बालिका को भगाने के आरोप में पकड़ कर लाई और चौकी पर बेरहमी से की गई पिटाई से उसकी मौत हो गई थी। नौ दिसंबर 2013 को कोतवाली बीसलपुर के गांव हाफिजगंज बन्होई निवासी 32 वर्षीय लीलाधर की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई थी। उस पर शिवलिंग तोड़ने का आरोप था। गुरुवार की सुबह पूरनपुर के मोहल्ला रजागंज निवासी सद्दाम और शकील की मौत से पुलिस का दामन एक बार फिर दागदार हो गया है। 
बाक्स
तीन सिपाहियों को हो चुकी है सजा भी 
थाना बिलसंडा की करेली पुलिस चौकी पर तैनात तीन सिपाहियों ने शिकार करने के आरोप में पकड़े गए अनुसूचित जाति के तोताराम की करीब एक दशक पहले पीटकर हत्या कर दी थी। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद कोर्ट में केस चला था। अदालत ने तीनों सिपाहियों को काफी पहले सजा भी सुना दी है। 
विज्ञापन

बाक्स
दोनों मृतकों की है क्राइम हिस्ट्री
पूरनपुर। एसपी एके सिंह ने बताया कि शकील कोतवाली का हिस्ट्रीशीटर था। उसके खिलाफ गुंडा एक्ट की भी कार्रवाई की गई थी। उसके खिलाफ करीब आधा दर्जन मुकदमे दर्ज हैं। सद्दाम को इससे पहले वर्ष 2014 और 2012 में भी मादक पदार्थ की बरामदगी पर जेल भेजा गया था। लेकिन उनकी क्राइम हिस्ट्री स्पष्ट नहीं कर पा रही है।

कोतवाली में भिड़े
कांग्रेसी और सपाई
- दलाल और आक्रोशित लोगों में कई बार हुई नोकझोंक
अमर उजाला ब्यूरो
पूरनपुर। दो युवकों की मौत के बाद कोतवाली में आक्रोशित लोगों ने जमकर हंगामा किया। पुलिस ने आक्रोशित लोगों को समझाने के लिए कुछ अपने पक्ष के छुटभैया नेताओं और दलालों को फोन कर कोतवाली बुला लिया था। जहां छुटभैया नेताओं, दलालों और आक्रोशित लोगों की कई बार आपस में नोकझोंक भी हुई। कांग्रेसी और सपा नेता भी कोतवाली में भिड़ गए। दोनों पक्षों में मारपीट की नौबत पर एएसपी ने दोनों पक्षों को समझाकर बमुश्किल शांत किया।
पुलिस कस्टडी में दो युवकों की मौत पर पुलिस के हाथ-पांव फूल गए। मामले को भांप कर पुलिस ने अपने करीबी छुटभैया नेताओं, दलालों को फोन कर कोतवाली बुला लिया। घटना की जानकारी पर कोतवाली मेें एकत्र हुई भीड़ ने जमकर हंगामा किया। कार्रवाई का आश्वासन आदि मिलने पर समझाने के प्रयास पर आक्रोशित लोगों की छुटभैया नेताओं और दलालों से कई बार नोकझोंक हुई। आक्रोशित लोगों ने छुटभैया नेताओं और दलालों के खिलाफ नारेबाजी भी की। कार्रवाई को लेकर कोतवाली मेें कांग्रेस और सपा नेता आपस में भिड़ गए। कांग्रेसी नेता राजिश खां, रेहान रजा आदि का कहना था कि सपा सरकार में अपराध चरम पर है। कोतवाली मेें पुलिस अभिरक्षा में ही पुलिस ने युवकों की हत्या की है। अब 2017 चुनाव मेें जनता इसका जवाब देगी। घटना को सपा सरकार पर थोपने का आरोप लगाते हुए सपा नेता मुन्ने मियां अंजाना, मोहम्मद मियां छोटे, तौफीक अहमद कादरी, व्यापारी नेता हाजी लाडने ने इसका विरोध किया। इस पर दोनों पक्षों में जमकर नोकझोंक के साथ मारपीट की नौबत आ गई। एएसपी ने बीच-बचाव कर दोनों पक्षों को बमुश्किल शांत किया। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें