पानी के अंधाधुंध दोहन से खाली हो रही धरती की कोख बचाने के लिए अमर उजाला की पहल रंग लाई है। राइस मिलर्स द्वारा चैनी धान न खरीदने के संकल्प के बाद अब किसानों ने भी चैनी न उगाने का निर्णय लेकर खेतों में तैयार खड़ी चैनी धान की पौध ट्रैक्टर चलाकर जोत डाली।
गेहूं की कटाई के बाद खाली हुए खेतों में पिछले कुछ वर्षों से चैनी धान उगाने के प्रति किसानों का रुझान बढ़ा है। दो से ढाई माह में तैयार होने वाली इस फसल में भूगर्भ जल का अत्याधिक दोहन होता है, जिससे जलस्तर के गिरने का अंदेशा बना हुआ है, साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान होता है। अमर उजाला ने 16 फरवरी के अंक में खबर प्रकाशित की थी। चैनी से होने वाले नुकसान को देखते हुए राइस मिलर्स ने भी चैनी धान न खरीदने का निर्णय लिया था, जिसे अमर उजाला ने नौ मार्च के अंक में प्रकाशित किया था। चैनी धान को लेकर अमर उजाला की यह पहल अब रंग लाई है। घुंघचाई क्षेत्र के तीन गांव रघुनाथपुर, सुंदरपुर और शिंभुआ के किसानों ने शुक्रवार को निर्णय लिया और ट्रैक्टर चलाकर रोपाई के लिए तैयार हो रही चैनी धान की पौध जोत डाली। इस पौध के खत्म होने से 500 से 700 एकड़ में चैनी धान की रोपाई नहीं हो सकेगी। किसानों की इस पहल की जानकारी होने पर कृषि अधिकारियों, वैज्ञानिकों एवं चैनी के खिलाफ अलख जगा रहे भाकियू जिला उपाध्यक्ष मंजीत सिंह ने खुशी जताई है।
किसान उगा सकते हैं मूंग और उड़द
किसानों द्वारा चैनी न उगाने का निर्णय सराहनीय हैं। अभी किसानों के पास दो से ढाई माह का समय है। ऐसे मे किसान उड़द अथवा मूंग की फसल बो सकते हैं। 12 से 14 किलो बीज प्रति एकड़ के हिसाब से बुवाई कर किसान 5-6 क्विंटल तक पैदावार ले सकते हैं। किसानों के लिए सरकारी बीज गोदामों पर मूंग बीज 150 और उड़द 175 रुपये प्रति किलो के हिसाब से उपलब्ध है जिसपर 35 रुपये का अनुदान भी है।
- डॉ. एसएस ढाका, कृषि वैज्ञानिक
किसानों को करेंगे सम्मानित
चैनी धान पर रोक लगाने मैंने गत वर्ष हाईकोर्ट में रिट दायर की थी। अब अमर उजाला की पहल किसानों ने चैनी की पौध नष्ट कर सराहनीय कार्य किया है। ऐसे किसानों को सम्मानित किया जाएगा।
- मंजीत सिंह, जिला उपाध्यक्ष, भाकियू