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बोलेरो पर पलटा डंपर, चार की मौत, नौ घायल

Fri, 17 Mar 2017 11:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अमरिया (पीलीभीत)।
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हादसा - फोटो : अमर उजाला
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सितारगंज (उत्तराखंड) के बिष्टी चौराहा पर हुआ हादसा 
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 उत्तराखंड के सितारगंज से लौट रहे मजदूरों से भरी बोलेरो कार पर बिष्टी चौराहा के पास डंपर पलट गया। हादसे में भूड़ा कैमोर के चार मजदूरों की मौत हो गई। नौ अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। 
थाना क्षेत्र के भूड़ा कैमोर गांव के दर्जनों युवक सितारगंज की एक फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं। प्रतिदिन निजी वाहनों से आते-जाते हैं। बृहस्पतिवार रात को गांव के 13 लोग ड्यूटी पर बोलेरो से गए थे। शुक्रवार सुबह ड्यूटी कर सभी उसी बोलेरो से वापस आ रहे थे। सितारगंज हाईवे पर बिष्टी चौराहा के पास पहुंचते ही मजदूरों से भरी बोलेरो पर डंपर पलट गया। इसमें मजदूर शेर सिंह (20) पुत्र स्वर्गीय मिंदर सिंह, हरचरन सिंह उर्फ पप्पू (45), सीताराम मौर्य (55) और हरिशंकर (45) की मौत हो गई। इसमें करन सिंह, ख्यालिराम, हरिराम, सूरजपाल, अमित गंभीर रूप से घायल हो गए। उत्तराखंड में हुए हादसे की सूचना घायलों ने ग्रामीणों को दी। इसके बाद पूरे गांव में हड़कंप मच गया। उत्तराखंड पुलिस ने सभी शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। एसओ अमरिया जितेंद्र यादव ने बताया कि हादसा उत्तराखंड में हुआ है। वहीं की पुलिस कार्रवाई कर रही है। 
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चारों पीड़ित परिवारों के समक्ष आर्थिक संकट
पीलीभीत। हादसे में मरने वाले चारों युवक गरीब परिवार से हैं। सभी छप्परपोश मकानों में जीवन यापन करते थे। चारों की मौत से उनके परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया है। मृतक शेर सिंह के पिता मिंदर सिंह की मौत हो चुकी है। इसके बाद से परिवार की जिम्मेदारी उसी के कांधों पर थी। बुजुर्ग मां रंजीत कौर व छोटे भाई मैहर सिंह के साथ वह रहता था। परिवार के पास जमीन नहीं है। वह खुद भले ही पढ़ाई छोड़ मजदूरी करने लगा, लेकिन छोटे भाई को शिक्षित बनाना चाहता था। वहीं मृतक हरचरन सिंह भी अपने परिवार का अकेला पालनहार था। उसके बेटी प्रीत कौर (18) व छोटा बेटा विक्कू सिंह है। बेटी की शादी को लेकर उसने तैयारी शुरू कर दी थी। काफी देर तक उसकी मौत की बात को ग्रामीण छिपाए रखे रहे। उसके घायल होने की जानकारी दी गई, लेकिन मौत का पता लगते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया। इधर हादसे में जान गंवाने वाले अधेड़ सीताराम के चार बच्चे, सभी अविवाहित है। इसके अलावा मृतक हरिशंकर की भी कच्ची गृहस्थी है। उसके पास मात्र एक एकड़ जमीन है। तीन बच्चे दीपक (16), रविंद्र (14) और दस साल की बेटी मंजू है। जिनको शिक्षित कर एक बेहतर भविष्य देने के लिए वह अधिक मेहनत व लगन से काम करता था। अचानक हादसे में उसकी मौत का पता लगते ही पत्नी मीना देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। 
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