पंद्रह दिन से बीमार चल रहे किशोर की जिला अस्पताल में मौत हो गई। घर वालों ने ब्लड बैंक कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। इसकी शिकायत मिलने पर सिटी मजिस्ट्रेट ने मामले की जांच शुरू करा दी है। एक टीम को मौके पर भेजकर पड़ताल भी कराई गई है। प्रारंभिक जांच में ब्लड बैंक कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं।
दियोरियाकलां कोतवाली क्षेत्र के दियोहना पट्टी के रहने वाले छेदालाल किसान हैं। उसके चार बच्चे सत्रह वर्षीय गुड्डू, रामसेवक, नन्ही देवी, सुनीता देवी हैं। दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है। पीड़ित छेदालाल के अनुसार बड़े बेटे गुड्डू को करीब पंद्रह दिन से पीलिया की बीमारी हो गई थी, जिसका पहले झाड़-फूंक कराते रहे। शनिवार को हालत बिगड़ने पर वह उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर आए। उसके शरीर में खून की कमी बताई गई। जिस पर पीड़ित ने रात में ही पांच-छह लोगों को बुला लिया। सभी खून देने के लिए राजी थे। उनको लेकर वह जिला अस्पताल परिसर स्थित ब्लड बैंक में गया। आरोप है कि वहां मौजूद कर्मचारियों ने खून देने आए लोगों का खून निकालने से ही इंकार कर दिया। तरह-तरह के बहाने बनाकर टालते रहे। पीड़ित ने बेटे की हालत खराब बताते हुए काफी गुजारिश की, लेकिन उसकी एक न सुनी गई, बल्कि किशोर के चाचा महेंद्रपाल और मामा जमुना प्रसाद से अभद्रता करने लगे। खून बेचने के आरोप में जेल भिजवाने की भी धमकी दी गई। रविवार सुबह जिला अस्पताल में भर्ती किशोर की मौत हो गई, जिसके बाद घरवालों ने खून की कमी से मौत होने की बात कही और ब्लड बैंक कर्मचारियों पर आरोप लगाया। इसकी शिकायत सिटी मजिस्ट्रेट जितेंद्र कुमार शर्मा से की गई, जिसके बाद उन्होंने अपर एसडीएम अरुण मणि त्रिपाठी को मौके पर जांच के लिए भेजा। शांति व्यवस्था के मद्देनजर सीओ सिटी निर्मल कुमार विष्ट को भी पुलिस की व्यवस्था अस्पताल परिसर में रखने के निर्देश दिए। टीम ने मामले की जानकारी जुटाकर जांच शुरू कर दी है।
अपर एसडीएम अरुणमणि त्रिपाठी को मामले की जांच दी गई है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
- जितेंद्र कुमार शर्मा, सिटी मजिस्ट्रेट
जानकारी मिली है। ब्लड बैंक वालों ने बताया कि जमुना प्रसाद नाम का व्यक्ति खून देने के लिए तैयार हुआ था। उसका फार्म भी भरा गया। जब ब्लड लेने की तैयारी की गई तो वह थोड़ी देर में आने की बात कहकर चले गए, फिर लौटे नहीं। स्टाफ को इमरजेंसी भेजकर वहां भी उनको तलाशा गया, लेकिन वहां भी नहीं मिले। ब्लड बैंक कर्मचारियों पर लगाए जा रहे आरोप गलत और निराधार हैं। फिर भी मामले की जांच कराई जाएगी। यदि कहीं कमी मिलती है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- आरसी शर्मा, सीएमएस