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नामांकन खारिज होने पर प्रत्याशी के पति ने कलक्ट्रेट में किया हंगामा, आत्महत्या की दी धमकी

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पर्चा खारिज होने पर प्रत्याशी के पति ने किया हंगामा, आत्महत्या की धमकी - फोटो : अमर उजाला
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पीलीभीत। नामांकन खारिज होने से क्षुब्ध प्रत्याशी नत्थो देवी के पति ने शनिवार को कलक्ट्रेट में जमकर हंगामा किया। उसने आत्महत्या करने की धमकी दी तो अफसरों के हाथ-पांव फूल गए। सिटी मजिस्ट्रेट ऋतु पूनिया ने मौके पर पहुुंचकर उसे शांत करने का प्रयास किया लेकिन वह नहीं माना। सूचना पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने हिरासत में लेने के बाद शाम को उसका शांतिभंग की आशंका में चालान कर दिया।
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माधोटांडा निवासी जिला पंचायत सदस्य रामऔतार की पत्नी नत्थोदेवी ने लोकसभा चुनाव के लिए सर्व समाज कल्याण पार्टी की ओर से गुरुवार को नामांकन दाखिल किया था। शुक्रवार को जांच के दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने नामांकन अपूर्ण बताकर खारिज कर दिया। उस दौरान नत्थोदेवी भी अपने पत्नी रामौतार के साथ मौजूद थीं। उन्हें बताया गया कि नामांकन के साथ चालान फार्म जमा नहीं किया गया था। लिहाजा उनका नामांकन खारिज किया गया है।
रामऔतार के मुताबिक नामांकन पत्र निरस्त होने पर उनसे पहले चालान फार्म जमा करने की बात कही गई, लेकिन कुछ देर बाद उनसे चालान फार्म लेने से मना कर दिया गया। कहा गया कि नामांकन निरस्त हो चुका है, इसमें कुछ नहीं हो सकता। इससे क्षुब्ध होकर रामऔतार शनिवार सुबह कलक्ट्रेट पहुंचे और हंगामा करने लगे। नामांकन बहाल नहीं करने पर आत्महत्या की धमकी देने लगा। इससे कलक्ट्रेट में हड़कंप मच गया। सिटी मजिस्ट्रेट ऋतु पूनिया डीएम के चैंबर में जनसुनवाई कर रहीं थीं। जानकारी होने पर वह मौके पर पहुंची और रामौतार को समझाने का प्रयास किया लेकिन वह डीएम से आश्वासन मिलने की बात कहकर चालान जमा करने की जिद पर अड़े रहे। काफी देर समझाने के बाद भी जब वह नहीं माने तो पुलिस को सूचना दी गई। इस पर सीओ सिटी धर्म सिंह मार्छाल, कोतवाल बृज किशोर पुलिस बल के साथ पहुंचे और रामऔतार को हिरासत में ले लिया। शाम को उनका शांतिभंग करने की आशंका में चालान कर दिया गया।
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अधूरी रह गई सांसद बनने की तमन्ना
रामऔतार के मुताबिक वह अपनी मोपेड से गांव-गांव जाकर पत्नी नत्थोदेवी को जिताने के लिए लोगों से अपील कर रहे थे, लेकिन प्रशासन ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। रामऔतार का कहना है कि उन्होंने भाजपा प्रत्याशी वरुण गांधी को टक्कर देने के लिए पत्नी को चुनावी मैदान में उतारा था। उम्मीद थी कि पत्नी सांसद बनेंगी, लेकिन सब सपने अधूरे रह गए।
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