बीसलपुर (पीलीभीत)। यूपी 100 पुलिस की गाड़ी से बाइक टकराने की मामूली सी बात पर सिपाहियों ने अकौड़ा गांव के संजीव को अपराधी बना दिया। यूपी 100 के चालक सिपाही राहुल सिंह ने दियोरियाकलां कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करा। गंभीर मामलों में भी जांच की बात कहने वाली दियोरिया पुलिस ने भी रिपोर्ट दर्ज करने के तुरंत बाद बगैर जांच किए संजीव को जेल भेज दिया। मौके पर मौजूद कुछ लोगों का कहना है कि संजीव की कोई खास गलती नहीं थी। मगर खाकी वर्दी के रौब में उसे जेल भेज दिया गया।
यह मामला मंगलवार दोपहर करीब 12.30 बजे का है। पुलिस ने बताया कि नौगमिया मोड़ पर संजीव ने यूपी 100 की बोलेरो को टक्कर मार दी थी। सिपाहियों के विरोध करने पर पर संजीव ने हाथापाई शुरू कर दी थी। जबकि संजीव और कई चश्मदीद इस आरोप को गलत बताते रहे थे। उनका कहना था कि संजीव की बाइक मोड़ पर खड़ी थी। तभी वहां पहुंची यूपी पुलिस की गाड़ी ने बाइक में टक्कर मार दी। संजीव के विरोध करने पर उसे सिपाही पीटने लगा। संजीव अपना बचाव करता रहा। इसी बीच अन्य दो पुलिसकर्मी पहुंच गए। तीनों पुलिस वाले संजीव को जबरन अपनी बोलेरो में बैठाकर ले गए और रिपोर्ट दर्ज कर जेल भेज दिया। ग्रामीणों के मुताबिक सजीव ने अपनी गलती न होते हुए भी पुलिस कर्मियों से माफी मांगी थी, लेकिन सिपाही उसे बंद कराने की धमकी देते हुए ले गए थे। पुलिस का यह रवैया ग्रामीणों को नागवार गुजरा। यही वजह रही कि बुधवार को संजीव के पक्ष में ग्रामीण अपना काम छोड़कर धरना प्रदर्शन करने जा पहुंचे। इस हरकत से पुलिस को अपनी फजीहत का सामना करना पड़ा।
वायरल हो रहे वीडियो की भी मदद लेंगे अफसर
यूपी 100 पुलिस के सिपाहियों और संजीव बीच हुए विवाद की कुछ वीडियो मंगलवार शाम से सोशल साइट्स पर वायरल हो चुकी है। ये वीडियो भले ही शुरूआत की न हो, लेकिन इसमें संजीव को गाड़ी में बैठाने की कोशिश पुलिसकर्मी कर रहे हैं। अब मामला तूल पकड़ चुका है। सच का पता लगाने के लिए अफसर इन वीडियो की भी मदद भी लेंगे।
विधायक के अलावा कई नेता रहे शामिल
बीसलपुर विधायक के अलावा जिला पंचायत सदस्य रामप्रताप गंगवार, जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष गोधनलाल राना, भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष डॉ रामबहादुर गंगवार, विधायक प्रतिनिधि विवेक वर्मा, अकोड़ा नौगमिया के प्रधान नरेश गंगवार, मधवापुर के प्रधान वीरेंद्र कुमार, भाजपा नेता शिवेंद्र दीक्षित आदि भी धरने में शामिल रहे। इनके अलावा आसपास के गांव मधवापुर, दियोरिया, नौगमिया, भगौतीपुर, मुड़िया भगवंत, जमुनिया महुआ, खरदहाई, पुरैना, मकरंदपुर, घुरी खुर्द, बसई पुरैना, बकैनिया दीक्षित और पैनिया हिम्मत के ग्रामीण भी धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने पुलिस कर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
चार घंटे थमा रहा ट्रैफिक
बीसलपुर-दियोरियाकलां मार्ग पर मधवापुर के पास हुए धरना-प्रदर्शन को लेकर इस मार्ग पर यातायात बाधित रहा। चार घंटे तक कोई राहगीर नहीं निकल सका। इधर से गुजरने वाले मुख्य मार्ग को छोड़ अन्य रास्तों से होकर गुजरे। इससे वाहनों की कतार भी लगी रही।
एक इंस्पेक्टर धमकाने में भी नहीं रहे पीछे
ग्रामीणों की ओर से लगाए गए जाम की सूचना मिलने पर दियोरियाकलां कोतवाली के अलावा बीसलपुर, बरखेड़ा और बिलसंडा से पुलिस बल को मौके पर बुला लिया गया था। इस बीच जहां अफसर जाम खुलवाने के लिए भीड़ से बातचीत करने में जुटे थे। वहीं एक इंस्पेक्टर ग्रामीणों को धमकाने से भी बाज नहीं आए। उनको आचार संहिता लागू होने की बात कहते हुए कार्रवाई का डर भी दिखाया। ताकि ग्रामीण जाम खोल दें, हालांकि उनका ये पैंतरा कोई काम नहीं आ सका।
पुलिस के खिलाफ पहले भी धरना दे चुके हैं विधायक रामसरन
सत्ता पक्ष के होने के बावजूद विधायक रामसरन वर्मा ग्रामीणों के समर्थन में पहले भी धरना प्रदर्शन कर चुके हैं। मार्च 2018 में हादसे में पिपरिया संजरपुर गांव की निवासी 14 वर्षीय सोमवती की की मौत के मामले में दियोरियाकलां पुलिस पर आरोपी कार चालक को छोड़ने का आरोप लगा था। ग्रामीणों ने चालक की गिरफ्तारी की मांग को लेकर दियोरियाकलां पुलिस के खिलाफ धरना दिया था। इसमें मौके पर पहुंचने के बाद विधायक रामसरन वर्मा इसी तरह से समर्थन करते हुए खुद भी धरने पर बैठ गए थे। इसके बाद आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होने के बाद ही धरना समाप्त किया गया था। आरोप चालक की गिरफ्तारी भी कराई गई थी।
इस पूरे मामले में जेल भेजे गए ग्रामीण संजीव की कोई गलती नहीं थी। पुलिस ने उसके साथ मारपीट की और फिर उसको ही जेल भेज दिया गया। इस मामले में दोषी पुलिसकर्मियों पर निलंबन की कार्रवाई कराई जाएगी। पुलिस अधिकारियों से इसको लेकर बात की गई है। संजीव को भी जेल से बाहर निकलवाया जाएगा। - रामसरन वर्मा, विधायक