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भाईचारे में जहर घोलने की कोशिश, कहीं साजिश तो नहीं!

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भाईचारे में जहर घोलने की कोशिश, कहीं साजिश तो नहीं!
प्रशासन से लेकर देशनगरवासी असमंजस में, कैसे बिगड़ गए हालात
वैभव शुक्ला
पीलीभीत। कभी बारावफात और होली का पर्व एक साथ मिल जुलकर मनाने वाले तराई के शहर को न जाने किसकी नजर लग गई है। पहले होली, फिर मोहर्रम पर हुए छिटपुट विवाद के दौरान भी गंगा-जमुनी तहजीब को शहरवासियों ने कायम रखा। देशनगर में भी कई बार आमने-सामने होने के हालात तो बने। फिर भी इतनी कड़वाहट नहीं घुल सकी, लेकिन शुक्रवार को हुए घटनाक्रम ऐसा रूप धारण किया, जिसकी चर्चा न सिर्फ शहर बल्कि आसपास के जिलों तक पहुंच गई। आलम यह रहा कि पथराव, फायरिंग के बाद पुलिस के सामने ही दूसरे पक्ष ने आगजनी करने तक की चेतावनी दे डाली। ऐेसे में यही उठ रहे हैं कि भाईचारे में जहर घोलने की कहीं साजिश तो नहीं?
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शहर के मोहल्ला देशनगर की आबादी करीब दस हजार है। यह मिश्रित आबादी का इलाका है। यहां 60 प्रतिशत हिंदू तो 40 प्रतिशत मुस्लिम लोग रहते हैं। मिश्रित आबादी होने के कारण क्षेत्र संवेदनशील कहा जाता है। पूर्व में छिटपुट विवाद भी आमने आते रहे हैं। कभी मोहर्रम तो कभी होली पर्व पर डीजे बजाने को लेकर शिकायतें पुलिस तक पहुंची। लोग जमा हुए लेकिन कभी ऐसे हालात नहीं बने। ऐसे माहौल में सिर्फ साइकिल की टक्कर लगने के बाद हुई कहासुनी ने इतना तूल पकड़ लिया कि पथराव, फायरिंग तक बात पहुंच गई। यही नहीं एक धर्मस्थल की दीवार में तोड़फोड़ की कोशिश से लेकर आगजनी की बातें तक कही जाने लगी। सड़कों पर आक्रोश सांप्रदायिक रूप लेता दिखाई देने लगा। घटना का उग्र रूप देख इसके पीछे की कहानी खुद स्थानीय लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर गई है। मोहल्ला देशनगर के सभासद राजेंद्र भारती ने भी यही कहा कि आज तक उनके क्षेत्र में कभी ऐसा विवाद नहीं हुआ।
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