हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज को जामा मस्जिद में नमाज पढ़ने से रोकने के मामले में चार माह बाद एक बार फिर पुलिस पर लापरवाही बरतने के आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ता के सवाल उठाने के बाद एसपी ने अब प्रकरण की विवेचना सीओ सिटी को दी है।
शहर के मोहल्ला छोटा खुदागंज निवासी हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज मुसफ्फे अहमद ने अगस्त 2018 को कोतवाली में एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें जामा मस्जिद के सदर इमाम इजहार अहमद बरकाती, आस्ताने हशमतिया दरगाह के सज्जादानशीं मौलाना जरताब रजा खां को नामजद किया गया था। वहीं एक पूर्व मंत्री की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए गए थे। उनका आरोप था कि छह अगस्त 2017 को वह मगरिब की नमाज पढ़ने के लिए शहर की जामा मस्जिद में गए थे। नमाज पढ़ने के बाद उनको दो लड़कों ने रोक लिया और मस्जिद के इमाम से मिलने की बात कही। इसका विरोध जताने पर जबरन वहीं पर रोके रखा। जब वह दोनों लड़कों के साथ इमाम के पास गए तो आरोप है कि इमाम ने उनको आगे से मस्जिद में नमाज पढ़ने न आने की बात कह डाली। ऐसा न मानने पर झगड़ा फसाद की धमकी दी गई। इस दौरान आस्ताने हशमतिया के सज्जादानशीं पर भी संगीन आरोप लगाए गए हैं। इस मामले की विवेचना पहले कोतवाली पुलिस कर रही थी। बाद में इस्लाम के जानकार से विवेचना कराने की मांग की गई। इस पर एसपी ने प्रकरण की विवेचना इंस्पेक्टर मुहम्मद कासिम को दे दी थी। कई माह से मामला ठंडे बस्ते में पड़ा होने पर अब शिकायतकर्ता रिटायर्ड जज ने कार्रवाई से असंतोष जताते हुए एसपी से शिकायत की। जिसके बाद अब फिर विवेचक बदला गया है। एसपी बालेंदु भूषण सिंह ने बताया कि इस मामले की विवेचना सीओ सिटी को दी गई है। निष्पक्ष जांच कराकर सामने आए तथ्यों के आधार पर अग्रिम कार्रवाई कराई जाएगी।