पीलीभीत। बृहस्पतिवार को कचहरी के निकट बाघ की तलाश में कांबिंग के दौरान हाथी पर चढ़ते समय डिप्टी रेंजर आरिफ जमाल को पीछे खड़े दूसरे हाथी (गजराज) ने सूड़ मार कर गिरा दिया था, जिससे वह घायल हो गए हैं। भीड़ देख भड़के इस गजराज को वन विभाग के अधिकारियों ने वापस दुधवा नेशनल पार्क भेज कर वहां मौजूद हथिनी गंगाकली को मंगाने का मन बनाया है। इस आशय की रिपोर्ट डीएफओ ने उच्चाधिकारियों को भेज दी है।
वनकटी से निकला बाघ खेतों से होता हुआ बृहस्पतिवार को सुबह कचहरी के निकट पहुंच गया था। लोगों को इसकी जानकारी तब हुई थी, जब कचहरी के निकट स्थित एक गत्ता फैक्टरी के आसपास मौजूद झाड़ियों में घास चरते समय एक गाय पर हमला कर उसे घायल कर दिया था। पशु चराने गए ग्रामीण की सूचना पर ही वहां हजारों की संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए थे तथा वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंच गई थी। बाघ को शहर की ओर बढ़ने से रोकने के लिए डीएफओ टाइगर रिजर्व कैलाश प्रकाश और डीएफओ सामाजिक वानिकी आदर्श कुमार ने बाघ को ट्रैंक्यूलाइज करने की तैयारी की। इसके लिए वनकटी चौकी से हाथियों को बुलाया गया। सर्च ऑपरेशन शुरू करने के लिए ट्रैंक्यूलाइजिंग टीम हाथियों पर चढ़ रही थी। इस दौरान हथनी पर चढ़ते समय पीछे खड़े हाथी गजराज ने डिप्टी रेंजर आरिफ जमाल को सूड़ मार कर गिरा दिया था, इतना ही नहीं गजराज ने उन्हें कुचलने के लिए पैर भी उठाया था, लेकिन मौजूद स्टाफ ने डिप्टी रेंजर को फुर्ती से खींच लिया था जिससे वह बाल-बाल बच गए थे। इस घटना में आरिफ जमाल के घायल हो गए थे। इस हमले की सचित्र खबर अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद सर्च वन महकमे ने आगे के सर्च अभियान में इस गजराज का इस्तेमाल न करने का मन बना लिया है। डीएफओ कैलाश प्रकाश ने भी अमर उजाला में सचित्र प्रकाशित खबर और अमर उजाला डिजिटल पर चली खबर की कटिंग और लिंक भेज कर इसकी पूरी जानकारी उच्चाधिकारियों को दी है। जिसमें गजराज को वापस दुधवा भेजकर पूर्व में एक बार पीलीभीत भेजी गई हथिनी गंगाकली को भेेजने की मांग की गई है। डीएफओ ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही गजराज को वापस भेजकर गंगाकली को मंगवाया लिया जाएगा।
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डिप्टी रेंजर के हाथ में हुआ फैक्चर
पीलीभीत। टाइगर सर्च ऑपरेशन के दौरान हाथी गजराज के सूड़ मारने से गिरकर घायल हुए डिप्टी रेंजर आरिफ जमाल शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में उपचार करा रहे हैं। यहां जांच में उनके बायें हाथ की दो अंगुलियों में फैक्चर पाया गया है। इस पर चिकित्सकों ने उनके हाथ पर प्लास्टर किया है। अमर उजाला टीम जब इस घायल डिप्टी रेंजर का हाल जानने अस्पताल पहुंची तो मौत के मुंह से बाल-बाल बचे इस वन अधिकारी के दिल का दर्द भी छलक आया। सरकारी कार्य के समय घायल हुए इस अधिकारी को न तो विभागीय अधिकारियों ने उपचार के लिए भर्ती कराया और न ही कोई जिम्मेदार अधिकारी उन्हें सायं तक देखने गया। विभाग की ओर से कोई मदद भी नहीं मिली है। केवल एसडीओ केपी सिंह ने व्यक्तिगत तौर पर अस्पताल पहुंचकर मिजाजपुर्सी की है।