फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ईऔ और पशु चिकित्साधिकारी पर आरोप तय

विज्ञापन
विज्ञापन
पीलीभीत। 24 गोवंशीय पशुओं की मौत के मामले में लापरवाही के आरोप में फंसे बरखेड़ा के तत्कालीन ईओ और पशु चिकित्साधिकारी की मुश्किल बढ़ेगी। पशु क्रूरता अधिनियम के तहत दर्ज की गई रिपोर्ट में विवेचना पूरी कर ली गई है। इसमें दोनों पर आरोप भी तय हो गए हैं। अब दोनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने के लिए डीएम से अनुमति मांगी गई है।
विज्ञापन

पिछले साल सात मई को बरखेड़ा नगर पंचायत की गोशाला से दो ट्रकों में 40 गोवंशीय पशु भरा पचपेड़ा गोशाला (अमरिया) भेजे गए थे। वहां गोशाला पहुंचते ही ट्रकों में लदे चार पशु मृत निकले थे। आठ मई को सात और नौ मई को आठ गोवंशीय पशुओं समेत 24 पशुओं की मौत हो गई थी। 12 मई को भरा पचपेड़ा गोशाला के पास सड़क किनारे इन गोवंशीय पशुओं के शव पड़े मिले तो हल्ला मच गया था। पहले अफसर मामला दबाने पर लगे रहे, मगर शोर बढ़ने पर इस मामले में तत्कालीन ईओ बरखेड़ा राकेश कुमार चौबे और पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वीरपाल सिंह पर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। एडीएम न्यायिक देवेंद्र प्रताप मिश्र की जांच में ईओ लापरवाही भी खुलकर सामने आई थी। जांच में पाया गया था कि दूसरी गोशाला में शिफ्ट करते समय गोवंशीय पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण नहीं कराया गया था। बेतरतीब ढंग से उन्हें ट्रकों में ठूंस दिया गया था। अनुमति भी आलाधिकारियों से नहीं ली गई थी। एडीएम की जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने ईओ राकेश कुमार चौबे को उनके मूल विभाग चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में वापस कर दिया था। पशुओं की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहर का अंदेशा जताते हुए विसरा सुरक्षित किया गया था। मगर विसरा जांच में भी मौत की वजह रूपष्ट नहीं हो सकी थी। बरखेड़ा पुलिस मामले ने इस मामले की विवेचना पूरी कर ली है। प्रभारी निरीक्षक बरखेड़ा केके शर्मा का कहना है कि विवेचना में कोई आरोपी न तो कम हुआ, न ही बढ़ा है। चार्जशीट के लिए अनुमति को पत्रावली डीएम को भेजी गई है।
शिफ्टिंग के दौरान पशुओं की मौत की घटना पिछले साल हुई थी। पुलिस की ओर से पत्रावली भेजी गई है तो इसे दिखवाया जाएगा। नियमानुसार निष्पक्ष निर्णय लिया जाएगा। - पुलकित खरे, डीएम
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें