पीलीभीत। नोड्यूज के नाम पर बकायेदारों से वसूली करने वाले संग्रह लिपिक पर गाज गिर गई। तहसीलदार की जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संग्रह लिपिक को निलंबित कर दिया है। इसके अलावा उस पर अनुशासनहीनता के भी संगीन आरोप थे।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में बकायेदारों से नो डयूज मांगे गए थे। इसके बाद संभावित उम्मीदवार नोड्यूज के लिए भागदौड़ करने लगे थे। वहीं, कुछ कर्मचारी मौके का फायदा उठाकर वसूली में लग गए थे। बीसलपुर तहसील में तैनात संग्रह लिपिक संजीव कुमार शुक्ला भी बकायेदारों को राहत देने के नाम पर वसूली करने में लग गए। तीन दिन पहले एक बकायेदार से रिश्वत लेते हुए संग्रह लिपिक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था।
एसडीएम बीसलपुर राकेश गुप्ता ने तहसील ध्रुव नारायण से मामले की जांच कराई। तहसीलदार की जांच में प्रथम दृष्टया रिश्वतखोरी के आरोप सही निकले थे। एसडीएम के माध्यम से जांच रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई थी। डीएम पुलकित खरे ने बताया कि नोड्यूज में धन उगाही का वीडियो वायरल हुआ था। जांच में आरोप सही पाए गए। यह भी सामने आया कि आरोपी संग्रह लिपिक संजीव कुमार शुक्ला ने सेवानिवृत्त कर्मचारी मोहन लाल की वेतन संबंधी पत्रावली एक साल से लंबित रख रखी है। इसे लेकर जब उससे पूर्व में जवाब मांगा गया था तो उसने कोई जवाब भी नहीं दिया था। यह अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आरोपी लिपिक को निलंबित कर दिया गया है।