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नेपाल के अधिकारियों ने एक माह बाद भी नहीं स्पष्ट की तस्वीर

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पीलीभीत। नेपाल पुलिस की गोली लगने से मरने वालों की संख्या अब बढ़कर दो हो चुकी है। मगर परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद नेपाल के अधिकारियों की ओर से दिए गए निष्पक्ष जांच के आश्वासन पर कोई नतीजा नहीं निकल सका है। भारतीय अधिकारियों को नेपाल प्रशासन ने कोई भी अपडेट नहीं दिया। ऐसे में घटना के बाद उठे सवालों के जवाब अब तक नहीं मिल सके हैं।
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पांच मार्च को इंडो-नेपाल सीमा पर हुई घटना में हजारा थाना क्षेत्र के टिल्ला नंबर चार के निवासी गोविंदा की मौत हो गई थी। दूसरे घायल गुरमेज की रविवार रात लखनऊ के अस्पताल में मौत हो गई, जबकि दो अन्य साथी पप्पू और रेशम सिंह सुरक्षित आ गए थे। इस घटना के बाद भारत-नेपाल सीमा पर कई दिनों तक तनाव के हालात रहे थे। नेपाल के कंचनपुर जिले के डीएम-एसपी के साथ जिले के डीएम-एसपी ने संयुक्त बैठक की थी। बरेली से एडीजी अविनाश चंद्र भी आए थे। मृतक गोविंदा के परिवार ने घटना भारतीय क्षेत्र में बताई थी। आरोप लगाया था कि नेपाल पुलिस भारतीय सीमा में घुसी और बेवजह गोली चला दी थी। उधर, नेपाल पुलिस ने तस्करी की घटना बताते हुए मुठभेड़ बताया था। इस पर जब दोनों देशों के अधिकारियों की बात हुई तो नेपाल के अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया था। मगर एक माह बाद भी जांच को लेकर कोई अपडेट नहीं मिला है।
घटना मेरे कार्यकाल में नहीं हुई थी। मामला पुराना है। इसे लेकर जानकारी की गई, मगर कोई भी अपडेट नेपाल के अधिकारियों से नहीं मिला है। - किरीट कुमार, एसपी
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इस मामले में दूसरे घायल के मरने की जानकारी मिली है। नेपाल के अधिकारियों की ओर से जांच का आश्वासन मिला था। मगर उसके बाद अभी तक कोई भी जांच रिपोर्ट नहीं दी गई है। न ही इसे लेकर कोई अपडेट किया गया है। - पुलकित खरे, डीएम
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