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फर्जी सट्टा कराने वाले 49 गन्ना माफिया पकड़े, कई रडार पर

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पीलीभीत। अब तक धान माफिया का खेल चल रहा था। मगर, पेराई सीजन नजदीक आते ही गन्ना माफिया भी सक्रिय हो गए हैं। विभागीय कर्मचारियों की साठ-गांठ से गन्ना माफियाओं ने अपने नाम से फर्जी सट्टे बनवा लिए। यही माफिया औने-पौने दामों में गन्ना खरीद कर उसे सेंटर में बेंचकर भारी मुनाफा कमाएंगे। शासन की सख्ती केे बाद हुए सत्यापन में माफियाओं का खेल खुलकर सामने आ गया। गन्ना विभाग ने 49 गन्ना माफियाओं को चिन्ह्ति कर उनके सट्टे निरस्त कर दिए हैं। फिलहाल, अभी अन्य फर्जी सट्टाधारक किसानों की जांच चल रही है।
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जनपद में फसलों की खरीद के दौरान माफिया का सक्रिय होना आम बात है। धान खरीद की तरह गन्ना खरीद माफिया भी सक्रिय हैं, क्योंकि नया पेराई सत्र शुरू होने वाला है। माफियाओं ने सर्वे के दौरान अफसरों और कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते छदम नाम से सट्टे बनवा लिए। शासन भी गन्ना खरीद में होने वाली गड़बड़ी रोकने के लिए पहले से ही सख्त है। विभागीय अधिकारियों को सट्टों का सत्यापन करने के निर्देश दिए गए थे। अधिकारियों ने सट्टों के सत्यापन के लिए राजस्व अभिलेखों और गन्ना क्षेत्रफल का मिलान कराया तो माफियाओं का खेल खुलकर सामने आ गया। सत्यापन में 49 ऐसे फर्जी किसानों के नाम फर्जी सट्टे बने पाए गए। इन किसानों के नाम जमीन नहीं है। यह फर्जी किसान गन्ना माफिया के रूप में किसानों से औने-पौने दामों में गन्ना खरीदकर उसे सेंटर पर बिक्री करके सीजन में मोटा मुनाफा कमाते हैं। गन्ना विभाग ने फर्जी पाए जाने के बाद सभी 49 फर्जी किसानों के सट्टे निरस्त कर दिए। अधिकारियों का कहना है कि अभी फर्जी सट्टों की जांच जारी है।
शासन के निर्देशानुसार गन्ने के सट्टों का सत्यापन कराया गया। अभिलेखों से मिलान में 49 फर्जी किसान पकड़ में आए हैं। इन सभी के सट्टे निरस्त कर कड़ी चेतावनी दी गई है।
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जितेंद्र मिश्र, जिला गन्ना अधिकारी
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