बरखेड़ा (पीलीभीत)। मजदूर की मौत के साढ़े तीन साल बाद कोर्ट के आदेश पर दर्ज की गई हत्या की रिपोर्ट में पुलिस ने 27 दिन बाद ही फाइनल रिपोर्ट लगा दी। विवेचना करने वाले इंस्पेक्टर का दावा है कि हत्या से जुड़ा कोई साक्ष्य नहीं मिला। जमीन के पुराने विवाद को लेकर पत्नी, ससुर समेत सात लोगों पर हत्या का आरोप लगाते हुए एफआईआर लिखवा दी गई थी।
बरखेड़ा थाना क्षेत्र के फूटाकुआं गांव निवासी श्यामाचरन पुत्र बिहारीलाल की तीन साल पहले संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उनका शव वर्ष 2016 में 28 अक्तूबर को मिर्जापुर (शाहजहांपुर) के गांव कापरपुर में पड़ा मिला था। पिता की ओर से तीन साल बाद सात जुलाई 2020 को कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने हत्या कर साक्ष्य छिपाने की रिपोर्ट दर्ज की थी। इसमें तिलहर (शाहजहांपुर) के मोहल्ला बिरिया बाबा निवासी मृतक की पत्नी शीला देवी, ससुर बालकराम, साले नागेंद्र सिंह उर्फ नूर सिंह, देवेंद्र, निगोही कस्बा के प्रेमनगर निवासी सुनील कुमार, राजीव, पतरासा कुंवरपुर (बरखेड़ा) निवासी सोमपाल को नामजद किया था। तीन साल बाद दर्ज हुई एफआईआर की विवेचना 27 दिन में ही पुलिस ने पूरी कर ली और उसमें फाइनल रिपोर्ट भी लगा दी। बरखेड़ा कोतवाली के इंस्पेक्टर कमल सिंह ने बताया कि विवेचना में मामला हत्या का नहीं पाया गया। मृतक का अपनी पत्नी से जमीन का विवाद चल रहा था। इसी की रंजिश में पिता ने बेटे के ससुराल वालों पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। तथ्यों के आधार पर फाइनल रिपोर्ट लगाई गई है।