पीलीभीत। जांच आख्या में विकास कार्याें में वित्तीय अनियमितता मिलनेे पर प्रधान के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए गए लेकिन अफसरों ने सचिव को सिर्फ आरोप पत्र ही जारी किया। 19 दिन बीत जाने के बाद भी सचिव के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकी है। ऐसे में विभागीय अफसर भी सवालों के घेरे में आ रहे हैं।
ब्लॉक बीसलपुर की ग्राम पंचायत इमलिया मरौरी गांव के प्रदीप कुमार ने शपथ पत्र के माध्यम से डीएम ज्ञानेंद्र सिंह से शिकायत की थी। आरोप लगाया कि प्रधान ने गांव में विकास कार्याें के लिए आए रुपयों का गोलमाल किया। डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दो सदस्यीय टीम गठित कर मामले की जांच कराई। जांच टीम ने रिपोर्ट डीएम को सौंपी। इसमें बताया कि प्रधान व सचिव ने अमृत सरोवर के जीर्णोद्धार के नाम पर करीब आठ लाख 21 हजार 513 रुपये गबन किया है। डीएम ने जांच रिपोर्ट के आधार पर 11 सितंबर को इमलिया मरौरी की प्रधान रिहाना बेगम के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए। सचिव पर कार्रवाई करने के विभागीय अफसरों को निर्देश दिए। इसके बाद भी अफसर सचिव को सिर्फ आरोप पत्र ही जारी कर सके हैं।
डीपीआरओ रोहित भारती ने बताया कि संबंधित सचिव को आरोप पत्र जारी किया है। जवाब आने के बाद संबंधित सचिव पर विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
सचिव की सहमति से ही किया जा सकता है पंचायत के विकास कार्याें का भुगतान
विभागीय नियमावली के अनुसार ग्राम पंचायत में जो भी विकास कार्य कराए जाते हैं। उनका भुगतान सचिव, प्रधान की सहमति और हस्ताक्षर के बाद ही किया जा सकता है। इसके बाद भी प्रधान पर तो जांच टीम ने आरोप सिद्ध कर दिए लेकिन संबंधित सचिव पर आरोप सिद्ध नहीं हो सके हैं।