पीलीभीत / बीसलपुर। बिलसंडा के सिंबुहा गांव के गौरीशंकर मन्दिर में श्री श्री 1008 श्री सिद्धेश्वर गिरी महाराज के ब्रह्म लीन होने के बाद से खाली चल रहे मंदिर के महंत के पद को लेकर विवाद हो गया। महंत सिद्धेेश्वर गिरी महाराज की षोष्टी के दौरान महंत पद पर बाबा आनंद गिरी उर्फ लाल बाबा को चुना गया। मगर, इसी पद की दूसरी प्रत्याशी साध्वी राधिकानंद गिरी ने महंत चुनने की प्रक्रिया पर सवाल उठा दिए। साध्वी ने स्वयं को महंत सिद्धेध्वर गिरी महाराज की शिष्या बताकर बाहर से आए संतों पर मंदिर की 18 एकड़ जमीन पर कब्जा करने की साजिश रचने के आरोप लगाए। साध्वी ने बिलसंडा पुलिस पर उन्हें आश्रम से ले जाकर थाने में नजरबंद करने का आरोप लगाया। साध्वी देर शाम एसपी से मिलने पीलीभीत भी गईं। मगर, उनकी एसपी से मुलाकात नहीं हो सकी। उनका आरोप है कि उनको गुरु की षोष्टी में जाने से भी रोका गया। महंत पद का चुनाव निष्पक्ष नहीं कराया गया।
सिंबहा गांव में प्राचीन गौरीशंकर मंदिर में लंबे समय से सिद्धेश्वर गिरी महाराज महंत थे। वह इसी महीने ही ब्रह्मलीन हो गए। रविवार को उनकी षोष्टी थी। इसमें कई अखाड़ों के संत महात्मा शामिल होने के लिए गौरीशंकर मंदिर में जमा हुए। दोपहर से भंडारा भी चला। इसके बाद मंदिर के महंत पद के लिए चुनाव कराया गया। चुनाव अधिकारी हरी गिरि जूना अखाड़ा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रेम गिरि जूना अखाड़ा के सभापति एवं शांति नाथ महंत नुरानपुर शिवमढ़ी, सत्य गिरि महंत लंगड़े बाबा, बद्रीनाथ डंडी स्वामी, शंकर गिरि जी महाराज, हल्द्वानी, महंत कुमारानन्द ,महंत अखिलेश गिरि, राजस्थान, कृष्ण गिरि, महंत हनुमान मढ़ी, केदार गिरि राजस्थान ने महंत प्रत्याशी के लिए बाबाओं के साथ ही जनता के भी हाथ उठावाकर चुनाव कराया। संत महात्माओं का कहना है कि इसमें साध्वी राधिका गिरि के पक्ष में केवल एक ही हाथ उठा। जबकि दूसरे प्रत्याशी आनन्द गिरि उर्फ लाल बाबा के पक्ष में बाकी लोगों ने हाथ उठाया। चुनाव अधिकारियों ने बहुमत से आनन्द गिरि उर्फ लाल बाबा को मंदिर का महंत घोषित कर दिया। जगत गुरु शंकराचार्य आनंद विभूति ने तिलक लगाकर और शाल ओढ़ाकर बाबा आनंद गिरि उर्फ लाला बाबा को महंत की गद्दी पर बैठाया। बाद में उनकी आरती उतारकर पुष्प वर्षा भी की गई। चुनावी प्रक्रिया से नाराज होकर साध्वी राधिका गिरि ने नए महंत पर आपत्ति की। एसडीएम सौरभ दुबे, सीओ प्रवीण मलिक, विजय कुमार त्रिवेदी तहसीलदार, इंस्पेक्टर हरिशंकर वर्मा आदि मौजूद रहे। भक्तों ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया और जगत गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया।
साध्वी बोलीं- यह मंदिर की जमीन हथियाने की साजिश
साध्वी राधिकानंद गिरि ने महंत की पूरी चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बाहर से आए साधु संतों ने उनकी आवाज को गलत तरीके से दबाया। ब्रह्मलीन गुरु ने उनको दीक्षा देकर आशीर्वाद दिया था। फिर भी उनकी षोष्टी में जाने से उनको रोका गया। साध्वी का कहना है कि उनके गुरु सिद्धेश्वर गिरी महाराज के ब्रह्मलीन होने के बाद उनके कहने के अनुसार उन्होंने मंदिर का ट्रस्ट बनाया था। वह इस ट्रस्ट की अध्यक्ष हैं। आठ नवंबर को ट्रस्ट का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया। अब बाहर से साधु आए हैं। इनका मकसद मंदिर की 18 एकड़ जमीन हथियाना है। इसको लेकर उनको धमकियां भी दी गई हैं। उन्होंने पुलिस से दो दिन पूर्व सुरक्षा मांगी थी, लेकिन बिलसंडा पुलिस ने एक नहीं सुनी। साध्वी का आरोप है कि उनसे एक पुलिसकर्मी ने सुरक्षा देने के बदले 50 हजार रुपये मांगे। वह इतने रुपये नहीं दे सकती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे पक्ष से पुलिस ने सांठगांठ कर मोटी डील कर ली और उनको गुरु के कार्यक्रम में जाने से रोक दिया। फिर पुलिस उनको थाने में नजरबंद किए रही। बाद में उनके समर्थकों की अनुपस्थिति में गुरु शंकराचार्य के आने से पहले ही चुनाव कर लिया गया। उनके पक्ष के लोगों को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया गया। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की शिकायत 112, 1090 और 1076 नंबरों पर भी की। मगर, न्याय नहीं मिला।
साध्वी राधिकानंद गिरि की ओर से लगाए जा रहे आरोप गलत हैं। पुलिसवालोंके अलावा प्रशासनिक अफसर भी मौके पर थे। पुलिस सिर्फ सुरक्षा के लिहाज से मंदिर में रही। न तो किसी के समर्थक को रोका गया, न ही पुलिस ने साध्वी पर कोई दबाव बनाया। - प्रवीण मलिक, सीओ बीसलपुर