पीलीभीत। दिवाली पर छूटे पटाखों का शोर और उससे निकलने वाला धुएं का प्रदूषण तो चटक धूप निकलने और तेज हवा चलने से कम हो चुका है, लेकिन इसका असर अब भी बरकरार है। दिवाली 10 दिन बाद तक शहर में वायु प्रदूषण की मात्रा खतरनाक स्थिति में पहुंच गई थी। मगर, अब 21 दिन बाद भी प्रदूषण कुछ कम तो हो गया, लेकिन हालात अब भी सामान्य नहीं हैं। पार्टीकुलेट मैटर(एक्यूआई) की स्थिति अब भी सामान्य से पांच गुना ज्यादा है। प्रदूषण पिछले सप्ताह के मुकाबले करीब चालीस फीसदी कम रहा।
रविवार को दिन में चटक धूप निकली। तेज हवा भी चली। मगर, वायु प्रदूषण एक्यूआई का स्तर 180 रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से 80 अधिक है। वायु में हवा के कणों की सामान्य मात्रा 51 से 100 तक मानी जाती है। हालांकि दिवाली के एक सप्ताह तक यह मात्रा 350 से 400 थी। शनिवार को भी पीएम-2.5 की मात्रा 200 थी। मगर यह रविवार को 180 पर आकर रुकी। जिला विज्ञान क्लब के पूर्व जिला समन्वयक लक्ष्मीकांत शर्मा के अनुसार दिवाली के बाद तेज हवा चलने और धूप निकलने से आसमान में छायी धुंध तो कम हो गई है। मौसम भी काफी हद तक साफ हो चुका है। हवा में प्रदूषित कणों की मात्रा में भी कमी आई है, लेकिन अब भी वायु प्रदूषण में एक्यूआई की स्थिति 100-200 के बीच है। यह स्थिति मध्यम में आती है। बीच में पराली जलाने से प्रदूषण की जितनी मात्रा घटनी चाहिए थी, उतनी तेजी से नहीं घटीं। रविवार को अधिकतम तापमान 28 और न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम वैज्ञानिक डॉ. एचएस कुशवाहा के अनुसार आने वाले दिनों में मैदानी इलाकों में हल्के बादल रह सकते हैं, लेकिन बारिश की संभावना नहीं। धूप खिलने से तापमान थोड़ा ऊपर नीचे हो सकता है।
बच्चों और बुजुर्गों को अधिक खतरा
डस्ट पार्टिकल बच्चों-बुजुर्गों को ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। पूर्व फिजिशियन डॉ. सीबी चौरसिया के अनुसार बुजुर्गों में सांस संबंधी ज्यादा दिक्कतें होती हैं। बच्चों के आर्गन ज्यादा संवेदनशील होते हैं, डस्ट पार्टिकल अंदर पहुंचने के बाद दमा, फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
प्रदूषण की स्थिति
स्थिति एक्यूआई
सामान्य 0-50
संतोषजनक 51-100
मध्यम 101-200
खराब 201-300
बेहद खराब 301- 400
गंभीर 401-500