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फर्जी डिग्री पर इलाज का मामला: डॉक्टर की अग्रिम जमानत खारिज

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पीलीभीत। फर्जी डिग्री से अस्पताल संचालित करने के आरोपी पंडित मैकूलाल वीरेंद्र नाथ अस्पताल के स्वामी डॉ.योगेंद्र नाथ मिश्र की अग्रिम जमानत अर्जी सुनवाई के बाद मामला गंभीर पाकर जिला एवं सत्र न्यायाधीश महताब अहमद ने निरस्त कर दी है।
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थाना सुनगढ़ी में डॉ.योगेंद्र नाथ मिश्रा के खिलाफ फर्जी डिग्री से अस्पताल संचालित कर मरीजों का उपचार करने और गलत उपचार कर लोगों को क्षति पहुंचाने के मामले में धोखाधड़ी सहित गंभीर धाराओं में बीते दिनों एफआईआर हुई थी। आरोपी डॉक्टर की ओर से गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत अर्जी जिला एवं सत्र न्यायाधीश महताब अहमद की अदालत में दाखिल की गई। कहा गया कि वह प्रतिष्ठित चिकित्सक हैं। इज्जतदार व्यक्ति हैं, उन्होंने केईएम हास्पिटल एंड सेठ जीएस मेडिकल परेल मुंबई से न्यूरो सर्जरी में ट्रेनिंग की है। जिस पर उन्हें सर्टिफिकेट ऑफ फैलोशिप इन न्यूरो सर्जरी हेड ऑफ द डिपार्टमेंट डॉ.अतुल गोयल ने जारी किया है। प्रमाण पत्र की प्रतियां भी कोर्ट में दाखिल की गईं। तर्क किया गया कि आईएफओ फोरेंसिक इस्टेंडर्ड एंड रिसर्च लखनऊ से प्रमाण पत्रों पर डॉ.अतुल गोयल के हस्ताक्षरों के संबंध में विशेषज्ञ आख्या भी प्रस्तुत की गई है। जिसके अनुसार प्रमाण पत्रों पर डॉ.अतुल गोयल के ही हस्ताक्षर हैं। यह भी कहा गया कि अभियोजन का यह दोषारोपण कि प्रमाण पत्र कूटरचित हैं और डॉ. अतुल द्वारा जारी नहीं किए गए हैं, यह गलत साबित होता है। बहस की गई कि पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने पर उनकी प्रतिष्ठा को भारी आघात पहुंचेगा। निजी स्वतंत्रता की भी क्षति होगी, अग्रिम जमानत देने की मांग की गई। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं के साथ ही प्रभारी जिला शासकीय अधिवक्ता अपराध धीरेंद्र मिश्र भी न्यायालय में मौजूद रहे। सुनवाई के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश महताब अहमद ने पारित निर्णय में अंकित किया कि मैकूलाल अस्पताल पीलीभीत का एक जाना-माना अस्पताल है। मरीज इस विश्वास के साथ अस्पताल आते हैं कि उन्हें बेहतर इलाज मिलेगा। यद्यपि भारी फीस भी इलाज के लिए ली जाती है। यह तथ्य सामने आता है कि जिन डिग्रियों के साथ अस्पताल का पंजीयन कराया गया है, वह या तो भारत में प्रैक्टिस हेतु मान्यता प्राप्त नहीं हैं या फिर जाली अथवा कूटरचित हैं। इस प्रकार चिकित्सक के विरुद्ध यह साक्ष्य है कि उन्होंने फैलोशिप इन न्यूरो सर्जरी के कूटरचित प्रमाण पत्र से स्वयं को न्यूरो सर्जन के रूप में प्रतिरूपित किया है। साधना देवी और वेगराज ने भी उन पर आरोप लगाए हैं। अभियुक्त ने स्वयं विशेषज्ञ आख्या प्रस्तुत की है। विशेषज्ञ को डॉ.अतुल के लेख व हस्ताक्षर किस प्रकार उपलब्ध कराए गए, यह स्पष्ट नहीं है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश महताब अहमद ने अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त करते हुए पारित आदेश में लिखा है कि जिस प्रकार चिकित्सक साक्ष्य इकट्ठा कर रहा है, उसको देखते हुए उनका खुला रहना स्वतंत्र विवेचना के लिए असुरक्षित एवं उचित नहीं है। उनसे पूछताछ की आवश्यकता प्रतीत होती है। साक्ष्यों के आधार पर ऐसा नहीं कहा जा सकता कि केवल उनकी मान व प्रतिष्ठा को धूमिल करने, तंग व परेशान करने के लिए झूठा मुकदमा कायम कराया गया है।
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