पीलीभीत। उत्तर प्रदेश बार काउंसिल ने प्रदेश के अधिवक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि नया सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (सीओपी) जारी होने तक अधिवक्ता पुराने प्रमाणपत्र और परिचय पत्र के आधार पर ही वकालत करने के पात्र होंगे।
प्रदेश बार काउंसिल की ओर से अधिवक्ता संगठनों को भेजे गए पत्र में कहा गया कि अधिवक्ताओं के बीच यह आशंका बनी हुई थी कि जिनके सत्यापन प्रमाणपत्र या परिचय पत्र पर वैधता वर्ष 2022, 2023 या 2024 अंकित है, उनका उपयोग वर्ष 2025 में मान्य होगा या नहीं। इस पर काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि नए सीओपी और परिचय पत्र जारी होने तक पूर्व में जारी दस्तावेज ही मान्य रहेंगे। जिला संयुक्त बार एसोसिएशन के अध्यक्ष धीरेंद्र मिश्र एडवोकेट ने बताया कि बार काउंसिल ने अधिवक्ताओं को अवगत कराया है कि सत्यापन और नवीनीकरण की प्रक्रिया पहले से प्रारंभ है। जमा किए गए सत्यापन फॉर्म, री-इश्यू फॉर्म और डिक्लेरेशन फॉर्म में संलग्न शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन संबंधित बोर्ड एवं विश्वविद्यालय से कराया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के अध्यक्ष शिव किशोर गौड़ की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि नए सीओपी जारी होने तक पुराने सत्यापन प्रमाणपत्र और परिचय पत्र के आधार पर ही अधिवक्ता वकालतनामा लगाने और वकालत करने का अधिकार रखते हैं। इस आदेश की सूचना सभी अधिवक्ताओं को दे दी गई है जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली है।