पीलीभीत। अमरिया तहसील क्षेत्र के रिहायशी इलाके में सालों से डेरा जमाए बाघों में कोरोना संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। हैदराबाद के वन्यजीवों में कोरोना संक्रमण का मामला सामने आने के बाद पीलीभीत टाइगर रिजर्व के बाघों की सघन मॉनिटरिंग की जा रही है, मगर यहां के बाघों को उनके ही हाल पर छोड़ दिया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक इंसानों से वन्यजीवों में कोरोना संक्रमण फैल रहा है। इन सब बातों को जान कर भी जिम्मेदार अंजान बने हुए हैं। ऐसे में यदि कोई एक बाघ संक्रमित हुआ तो यह पूरा कुनबा संक्रमण की जद में आ सकता है।
बाघों के लिए मशहूर पीलीभीत का जंगल आज आबादी क्षेत्र में बाघों की मौजूदगी के लिए सुर्खियों में है। जनपद के अमरिया तहसील क्षेत्र में वर्ष 2012 में जंगल से निकला एक बाघिन समेत दो शावक का कुनबा विशनपुर में पहुंचा था। बाघिन और उसके शावकों द्वारा कोई इंसानी हमला न करने की वजह से उस दौरान वन विभाग ने भी इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। धीरे-धीरे यह कुनबा बढ़ता चला गया और आठ साल बाद यहां 10 से अधिक बाघ-बाघिन और शावक रिहायशी इलाके में ही खेतों और नदी किनारे की झाड़ियों में डेरा जमाए हुए हैं। इन बाघों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सामाजिक वानिकी प्रभाग के हवाले है। दीगर बात यह है कि रिहायशी इलाके में रहने के बावजूद इन वन्यजीवों ने कभी किसी बड़ी घटना को अंजाम नहीं दिया। पिछले साल शासन स्तर से इन बाघों को जंगल में शिफ्ट करने का मामला जोर-शोर से उठा था, मगर आज तक इस पर अमल नहीं हो सका।
पीटीआर की अपेक्षा अमरिया के बाघों में संक्रमण का खतरा अधिक
हैदराबाद में आठ शेरों के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद जनपद के बाघ-तेंदुओं पर भी खतरा मंडराने लगा है। वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक वन्यजीवों में कोरोना संक्रमण इंसान के जरिए ही होता है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर पीटीआर के बाघों की सुरक्षा को लेकर व्यापक प्रबंध किए गए। सभी पांच रेंजों में वीडियो कैमरे लगाकर बाघों के स्वभाव पर लगातार नजर रखी जा रही है, मगर अमरिया में रहने वाले बाघों की कोरोना से सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। सामाजिक वानिकी प्रभाग के मुताबिक यहां डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और डब्ल्यूटीआई द्वारा पहले जो कैमरे लगाए गए थे, वहीं कैमरे लगे हैं। अलग से कोई कैमरे नहीं लगाए गया है। इन बाघों की सुरक्षा में 10 वनकर्मी लगे हैं। जो रोस्टरवाइज टीमें बनाकर इनकी सुरक्षा करते हैं। अहम बात यह है कि पीटीआर के बाघों की अपेक्षा अमरिया के बाघों को कोरोना से अधिक खतरा है। वजह यह है कि यह सभी इंसानों के संपर्क में रहते हैं।
इन क्षेत्रों में रहती है बाघों की मौजूदगी
अमरिया में बाघों के मूवमेंट पर गौर करें तो विशनपुर, गजरौला फार्म, शुक्ला फार्म, पैरी फार्म, कटैइया बढनी के एसपी फार्म में बाघों का मूवमेंट देखा जाता है। इन क्षेत्रों में रहने वाले किसान शाम चार बजे तक ही खेतों में रहते हैं। खेत में लेबर के काम करने पर दो से चार आदमी सुरक्षा को लगाए जाते हैं। फिलहाल इन क्षेत्रों में रहने वाली आबादी हमेशा ही खौफ के साये में गुजर बसर कर रही है।
अमरिया क्षेत्र में बाघ का मूवमेंट आबादी में नहीं बल्कि देवहा नदी के किनारे डबरी (बड़ी घास व झाड़ी) में देखा जा रहा है। यहां पूर्व से ही कैमरे लगे हुए हैं। अलग से कोई कैमरे नहीं लगाए गए हैं। वनकर्मियों की टीमें रोस्टर के अनुसार इनकी निरंतर निगरानी में लगी हैं। - संजीव कुमार, डीएफओ, सामाजिक वानिकी प्रभाग