पीलीभीत। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर शुरू होने के बाद एक बार फिर प्रवासी मजदूर अपने घरों को लौटना शुरू हो गए हैं। ऐेसे में जनपद में संक्रमण का खतरा तेजी बढ़ा गया है। बार्डर पर बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों की सैंपलिंग के लिए बैठाई गई टीमें भी सिर्फ रोडवेज बसों पर ही ध्यान दे रही हैं। प्राइवेट वाहनों से आने वाले लोगों पर कोई गौर नहीं किया जा रहा है। जबकि रोजाना प्रत्येक बार्डर से कम से कम 50 लोगों को आवागमन होता है।
एक दिन पहले पूरनपुर के मोहल्ला खानका के रहने वाले युवक की कोरोना संक्रमण से मौत हो गई थी। इस मामले में जब छानबीन शुरू की गई तो निगरानी समिति और सर्विलांस टीम की लापरवाही सामने आई। पता चला कि मृतक युवक तीन दिन पहले निजी वाहन से दिल्ली से अपने घर आया था। जहां अचानक उसकी तबीयत खराब हुई तो युवक के परिवार वाले उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां उसकी कोरोना से मौत हो गई। इस मामले में डीएम पुलकित खरे ने टीम से जवाब तलब किया है। इधर शासन के सख्त निर्देश हैं कि बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों की निगरानी की जाए ताकि वह बिना जांच कराए अपने घर तक न जा सकें।
शासन के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बरेली बार्डर, अमरिया-सितारगंज बार्डर, मुड़लिया बार्डर, चुर्रासकतपुर बार्डर और पूरनपुर बार्डर पर टीमें लगाई हैं। यहां पर सिर्फ रोडवेज बसों से आने वाले लोगों की चेकिंग की जा रही है। जनवरी 2021 से 10 अप्रैल तक 74578 लोगों की सैंपलिंग की गई है। इसमें 120 लोगों कोरोना पॉजिटिव मिल चुके हैं। वर्तमान में 65 एक्टिव केस चल रहे हैं।
इधर स्वास्थ्य विभाग की बार्डर पर चल रही चेकिंग में सेंध लगाकर सप्ताह भर के अंदर कई लोग बिना जांच कराए दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल, मुंबई से वापस अपने घर और रिश्तेदारी में आए हैं। वहीं प्रदेश भर के जिलों से भी लोग अपने घरों को पहुंचे, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की सर्विलांस टीम को भनक तक नहीं लगी। ऐसे में जब लोगों की तबीयत खराब हो रही है तभी वह कोरोना की जांच कराने अस्पताल पहुंच रहे हैं।
केस- एक
मोहल्ला दुर्गाप्रसाद में दिल्ली से पहुंचा युवक, टीम को नहीं लगी भनक
शहर के मोहल्ला दुर्गा प्रसाद में रहने वाला एक युवक करीब 10 सालों से दिल्ली में रहकर नौकरी कर रहा था। सप्ताह भर पहले वह बिना कोरोना की जांच कराए अपने घर पहुंचा और परिवार वालों से मिलने के बाद वापस भी लौट गया। लेकिन सर्विलांस टीम को जानकारी तक नहीं हो सकी। ऐसे में निगरानी टीमों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
केस- दो
गाजियाबाद में पॉजिटिव मिली दो सगी बहनें पहुंच गई रिश्तेदारी में, सर्विलांस को नहीं जानकारी
गाजियाबाद की रहने वाली दो सगी बहनें शहर के मोहल्ला आसफजान में एक रिश्तेदारी में आई हुई थी। इस दौरान उनकी गाजियाबाद बार्डर पर जांच की गई। इसके बाद वह पीलीभीत पहुंच गई। खास बात यह है कि बरेली बार्डर पर उनकी चेकिंग तक नहीं की गई। जब गाजियाबाद में उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो गाजियाबाद के स्वास्थ्य विभाग ने दोनों बहनों से संपर्क किया। तो उन्होंने पीलीभीत में होने की बात कही। इस पर गाजियाबाद के स्वास्थ्य विभाग ने पीलीभीत सीएमओ को मामले की सूचना दी। इसके बाद टीम को जानकारी हो सकी। दोनों संक्रमित बहनों को कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
बार्डर पर चेकिंग में कुछ इस तरह होता है फर्जीवाड़ा
बार्डर पर बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों की सैंपलिंग के लिए टीमों को लगाया गया है, मगर अधिकतर टीमें कुछ देर तो सैंपलिंग करती हैं, इसके बाद कागजों में आंकड़ों को दुरुस्त करने का खेल शुरू हो जाता है। चलती हुई कार के नंबर नोट कर फर्जी मोबाइल नंबर अपडेट कर देते हैं। ताकि वह आकंड़ों में अपनी कार्यशैली को दुरुस्त दिखा सकें। अधिकांश मोबाइल नंबर रजिस्ट्रर में ऐसे नोट होते हैं, जो पूर्णतया गलत होते हैं।
पिछले साल 2020 से अब तक हुई सैंपलिंग की रिपोर्ट
कुल सैंपलिंग - 375884
कुल प्राप्त रिपोर्ट - 373846
सीबीनॉट मशीन की जांच - 20
पॉजिटिव केस की संख्या- 4305
पॉजिटिव दर - 1.15
निगेटिव रिपोर्ट की संख्या - 369561
रिकवर लोगों की संख्या- 4153
रिकवरी दर - 96.47
मौतें - 87
मृत्यु दर - 2.02
एक्टिव केस की संख्या - 65
एल-2 कोविड अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या - 11
एल-3 कोविड अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या- सात
होम आइसोलेट मरीजों की संख्या - 39
बाहरी जिलों में प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करने वालों की संख्या - आठ
कोरोना की जांच करने वाली टीमों को निर्देश दिए जा चुके हैं कि वह बाहर से आने वालों की सैंपलिंग जरूर करें। अगर किसी तरह की समस्या आती है, तो संबंधित पुलिस चौकी पुलिस या अफसरों से संपर्क करें। अगर औचक निरीक्षण में किसी भी लापरवाही सामने आई तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ