पीलीभीत। जिला जेल में कोरोना संक्रमण पहुंचने का सोर्स अभी पता नहीं लग सका है। मगर एक अंदेशा अब स्वास्थ्य विभाग को भी है कि कहीं जिला अस्पताल में इलाज के बाद वापस जेल पहुंचने वाले बंदियों से तो संक्रमण नहीं फैला। इस दिशा में भी पड़ताल की जा रही है।
जिला कारागार में 13 बैरकों में 602 बंदियों को रखने की क्षमता है। इसके बावजूद इस समय जिला जेल में वर्तमान में 945 बंदी हैं। कोरोना काल में जेल में भेजने वाले बंदियों की पहले लैब से कोरोना की जांच करने के बाद ही जेल भेज जा रहा है। इसके बावजूद जेल में कोरोना पहुंच गया, यह सवाल बना हुआ है। कोरोना संक्रमण के सोर्स की तलाश में जुटी टीम के मुताबिक जिला जेल से एक से 15 सितंबर तक 38 बंदी जेल से जिला अस्पताल में सुरक्षा के बीच दवाई लेने, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड करने पहुंचे थे। बंदियों को इन दिनों लगातार जेल से अस्पताल का आना जाना लग रहा।
आठ सितंबर को शासन के निर्देश पर जिला जेल में कोरोना टेस्टिंग कराई गई तो जांच रिपोर्ट में चार बंदी कोरोना संक्रमित निेकले थे। ये चारों जिला अस्पताल से दवाई लेकर वापस आए थे। इस पर जेल प्रशासन ने जेल में समस्त बंदियों और कैदियों की कोरोना जांच कराई। दो दिन में बंदियों और कैदियों की जांच कर सैंपल को लैब भेज दिया गया। 16 सितंबर को बरेली आईवीआरआई लैब से आई जांच रिपोर्ट में 105 बंदी संक्रमित निकले। दोबारा से 18 सितंबर को आई जांच रिपोर्ट में 40 बंदी फिर से कोरोना पॉजिटिव आए। इन बंदियों में 11 बंदी ऐसे निकले जो न्यायालय में पेशी पर गए थे। फिर 20 सितंबर को आई जांच रिपोर्ट में 35 बंदी और कोरोना संक्रमित निकले। इस हिसाब से जेल में 180 बंदी और कैदी कोरोना संक्रमित हो चुके हैं।
अनुमान लगाया जा रहा है कि पूर्व में संक्रमित मिले चार बंदियों की वजह से ही जेल में कोरोना पहुंचा था। क्योंकि चारों बंदी अलग-अलग बैरक में रखे गए थे, इसलिए वे अन्य बंदियों के संपर्क में रहते थे। इस तरह संक्रमितों के संपर्क में आने की वजह से पूरी जेल में कोरोना घुस गया। हालांकि स्वास्थ्य विभाग और जेल प्रशासन इसे कोरोना फैलने का सोर्स नहीं माना रहा है और पड़ताल में जुटा है। तो वहीं जेल के कुछ कर्मचारी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं।
113 बंदियों का जेल में एक डॉक्टर के सहारे चल रहा इलाज
जिला जेल में बंदियों के पॉजिटिव निकलने के बाद तीन बैरकों को आइसोलेशन वार्ड बनाया है। जेल में अब तक 180 कोरोना संक्रमित निकल चुके हैं। इनमें से बिना लक्षण वाले 113 बंदियों को जेल में आइसोलेट किया है। बाकी को जेल से कोविड अस्पताल में भर्ती कर दिया गया। लेकिन आइसोलेट संक्रमितों की निगरानी और इलाज के लिए मात्र एक डॉक्टर ही मौजूद है। जेल में स्टाफ की कमी के चलते जेल अधीक्षक ने सीएमओ को पत्र लिखकर और डॉक्टर नियुक्त करने के लिए भेजा है। हालांकि अभी तक कोई भी डॉक्टर या अन्य कोई स्टाफ यहां तैनात नहीं किया है।
जेल में कोरोना संक्रमण का सोर्स तलाश किया जा रहा है। लगातार बंदियों की निगरानी की जा रही है। जेल में स्टाफ की कमी को देखते हुए डॉक्टर को नियुक्ति कर दिया है। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ