पीलीभीत। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन भले ही ग्रामीण इलाकों में कोरोना रोकने की कोशिश के दावे कर रहा हो, लेकिन स्थिति में ज्यादा कोई बदलाव नहीं है। यह इसलिए कहा जा रहा है। कुछ दिन पहले ग्रामीण इलाकों में कराएं गए सर्वे में 1392 ग्रामीणों में कोरोना के लक्षण मिले थे। जिनकी एंटीजन किट से कोरोना जांच कराई। तो सिर्फ 21 ही कोरोना पॉजिटिव मिले हैं, जबकि निगेटिव निकले मरीजों में कोरोना के लक्षण साफ दिखाई दे रहे थे, फिर भी उनकी आरटीपीसीआर से कोरोना की जांच नहीं कराई गई। उन्हें स्वास्थ्य मानते हुए उनके हाल पर छोड़ दिया गया। जो संक्रमण को बढ़वा दे सकते हैं।
जिले में 26 अप्रैल को पंचायत चुनाव निपटने के बाद कोरोना संक्रमण की रफ्तार ग्रामीण इलाकों में भी तेजी से फैलना शुरू हो गया। हर गांव में खांसी, जुकाम, बुखार, सिरदर्द और सर्दी के मरीज मिलने लगे थे। इसके अलावा कई लोगों की बुखार से मौत भी हो गई, शासन के निर्देश पर ग्रामीण इलाकों में कोरोना की रोकथाम करने के लिए पांच मई से 10 मई तक ग्रामीण इलाकों में डोर-टू डोर सर्वे कराकर ऐसे लक्षण वाले मरीजों को चिह्नित किया गया था। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2,56235 मकानों का सर्वे किया गया था। जिसमें 1392 ग्रामीणों मेें कोरोना के लक्षण मिले थे। स्वास्थ्य विभाग ने सभी का एंटीजन किट से कोरोना की जांच कराई। जिसमें सिर्फ 21 लोग कोरोना पॉजिटिव मिले, बाकी सभी निगेटिव आए। जोकि चौंकाने वाला आंकड़ा है। शासन की गाइडलाइन के मुताबिक अगर किसी लक्षणयुक्त मरीज की एंटीजन किट से जांच रिपोर्ट निगेटिव आती है, तो उसे सटीक नहीं माना जाएगा। उसकी आरटीपीसीआर से सैंपल लेकर लैब में जांच को भेजा जाएगा। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने एंटीजन किट से ही जांच कर औपचारिकता पूरी कर ली। ऐसे में अगर कोई संक्रमित हुआ। तो दिक्कत बढ़ सकती है।
सर्वे वाले सभी व्यक्ति का सैंपल कराया गया है। इसके अलावा दोबारा से भी गांव में टीम लगाकर सैंपलिंग करने की योजना शुरू कराई जा रही है। लोग कोरोना के प्रति जागरूक होकर अपनी बीमारी को छिपाएं न बल्कि जांच कराकर अपना समय से इलाज कराएं। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ