पीलीभीत। कोरोना संक्रमण फैलने के बाद जेल में बहुत सावधानी बरती गई। बाहर से आने वाले बंदियों की कोरोना जांच हुई। तमाम बंदियों को अस्थायी जेल में रखा गया। जब उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई, तब उन्हें स्थायी जेल लाया गया। इस कवायद का मकसद यह था कि कोई भी संक्रमित जेल में पहुंचकर अन्य बंदियों को संक्रमित न कर दें। मगर, आखिर में वही हुआ, जिसका डर था। हफ्ते भर में जिला जेल में 145 बंदी कोरोना संक्रमित निकल चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग और जेल प्रशासन सकते में है कि आखिर जेल में कोरोना पहुंचा कैसे। स्वास्थ्य विभाग को कोरोना संक्रमण के सोर्स का पता नहीं चला।
जिला कारागार में 13 बैरकों में 602 बंदियों को रखने की क्षमता है। इसके बावजूद इस समय जिला जेल में वर्तमान में 945 बंदी हैं। कोरोना काल में जेल को संक्रमण से बचाने के लिए अस्थाई जेल भी बनाई गई। नए बंदियों को जेल में भेजने से पहले उनकी लैब से कोरोना की जांच कराई जाती है। जांच रिपोर्ट न आने तक उन्हें उसी अस्थाई जेल में रखा जाता है। जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर बंदियों को कोविड अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। रिपोर्ट निगेटिव आती है तो उन्हें जेल भेजा जाता है। इधर, अस्थायी जेल में बंद किसी बंदी की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आती है तो जेल में बंद सभी बंदियों की एंटीजन किट से जांच कराए जाने का प्रावधान है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि अगर किसी बंदी को खांसी, बुखार, सिरदर्द, जुकाम जैसे लक्षण होने पर पहले उसकी एंटीजन किट से जांच कराई जाती है, तब रिपोर्ट निगेटिव पर भी उस पर पूर्णतया विश्वास नहीं किया जाता है। उसके बाद भी लैब से उस बंदी की कोरोना जांच होती है।
हाल ही में शासन का आदेश आने के बाद जेल प्रशासन ने सभी बंदियों की कोरोना जांच कराई थी। उसमें 16 सितंबर को 105 बंदी संक्रमित निकले। स्वास्थ्य विभाग ने 86 बंदियों को तो जेल में ही आइसोलेट कर दिया। बाकी 19 संक्रमितों को कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार देर रात आई जांच रिपोर्ट में जेल के अंदर 40 बंदी फिर से कोरोना पॉजिटिव निकले। जेल में लगातार बंदी कोरोना पॉजिटिव निकलने से जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग दोनों बेचैन हैं। स्वास्थ्य विभाग यह अनुमान लगाने में जुटा है कि जेल के अंदर कोरोना पहुंचा कैसे? कयास लगाए जा रहे हैं कि कहीं स्वास्थ्य टीम ने ही तो शुरुआत में सैंपल लेने में लापरवाही नहीं बरती। उसका खामियाजा अब भुगतना पड़ रहा हो। फिलहाल तो कोरोना संक्रमण फैलने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जेल प्रशासन पर हीलाहवाली बरतने का ठीकरा फोड़ा है। स्वास्थ्य टीम का कहना है कि जेल में कोई बिना सैंपल कराए कोरोना संक्रमित किसी बंदी को खाने-पीने का सामान देने के बहाने या किसी अन्य तरीके से अंदर पहुंच गया। इसी के चलते जेल में संक्रमितों की संख्या बढ़ने लगी है। स्वास्थ्य विभाग जेल के अंदर कोरोना संक्रमण फैलने का सोर्स तलाशने में जुटा है। अब तक जेल के अंदर कोरोना संक्रमण पहुंचने के सोर्स का पता नहीं चल पाया है।
जेल में बिना कोरोना जांच कराए कोई भी बंदी नहीं भेजा जाता है। फिर कैसे बंदियों को संक्रमण होने लगा। इस बात की पड़ताल की जा रही है। जेल में कोरोना संक्रमण फैलने का सोर्स तलाश रहे हैं। अब वहां बाकी बचे बंदियों और ड्यूटी करने वाले स्टाफ की भी सैंपलिंग कराई जाएगी। -डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ