जनाधार वाली कांग्रेस जिले के लिए अतीत की बात हो चुकी है। आजादी के बाद हुए कई चुनावों तक जिले की सभी सीटों पर दबदबा दिखाने वाली कांग्रेस को अब हजार-दो हजार वोट जुटाना भारी पड़ जाता है। यह अलग बात है कि जब कभी व्यक्तिगत जनाधार वाले नेता कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ते हैं तब जरूर पार्टी मुख्य संघर्ष में दिखाई देने लगती है। 2002 के चुनाव में पीलीभीत शहर सीट से भाजपा से बाहर हुईं राजराय सिंह कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरी थीं जो चर्चित आईएएस अधिकारी राय सिंह की पत्नी थीं। इस चुनाव में वह तीसरे स्थान पर रहीं, उन्हें 17805 वोट ही मिल पाए। 2007 में राजराय ने दोबारा कांग्रेस के टिकट पर तो उन्हें सिर्फ 3981 वोट ही मिल पाए। 2012 में भाजपा से टिकट न मिलने पर दो बार विधायक रह चुके बीके गुप्ता ने भी कांग्रेस के बूते मैदान मारने की कोशिश की लेकिन पांचवें नंबर से आगे नहीं बढ़ पाए। हाल के चुनावों में बरखेड़ा सुरक्षित क्षेत्र में भी कांग्रेस का प्रदर्शन शर्मनाक रहा है। 2002 में कांग्रेस उम्मीदवार जुक्खनलाल यहां 3014 मत प्राप्त कर छठे नंबर पर रहे थे। 2007 में प्रत्याशी मनोज कुमार को भी सिर्फ 4486 वोट मिले। 2012 में सीट अनारक्षित हो गई तो कांग्रेस ने जोगेंद्र सिंह को प्रत्याशी बनाया जो पार्टी को 8948 वोट ही दिला सके।
शर्मनाक प्रदर्शन की तस्वीर
क्षेत्र वर्ष वोट
पूरनपुर 2002 2484
बीसलपुर 2002 878
बीसलपुर 2007 2735
इन चेहरों ने रखी लाज
जिले की राजनीति में अच्छा कद रखने वाले नेता हाल के सालों में जब कभी किसी परिस्थितिवश कांग्रेस का टिकट लेकर चुनाव मैदान में उतरे तब जरूर यह पार्टी लाज बचाने में कामयाब हो पाई। 2007 में किसान नेता एवं पूर्व विधायक वीएम सिंह जब पूरनपुर से कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़े तो पार्टी को 41926 मत दिलाए थे लेकिन खुद हारकर दूसरे नंबर पर रहे। 2012 में पूरनपुर सुरक्षित सीट से पूर्व विधायक सुखलाल कांग्रेस टिकट पर लड़े तो 36773 मत लेकर तीसरे नंबर पर रहे। 2012 में बीसलपुर से बसपा के शासन में मंत्री रहे अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़े तो 55533 वोट मिले। वह दूसरे नंबर पर जरूर रहे लेकिन चुनाव जीते भाजपा प्रत्याशी रामसरन वर्मा से उन्हें आधे से भी कम वोट मिले। 1985 में पूरनपुर से पूर्व विधायक डा. विनोद तिवारी ने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर 40 हजार से ज्यादा वोट पाए थे।