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डेढ़ दशक बाद भी नहीं मिले पट्टे

Sun, 22 Jan 2017 10:36 PM IST
ब्यूरो /पीलीभीत
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16 सालों में कई सरकारें बदली, जन प्रतिनिधि बदले और प्रशासनिक अधिकारी भी। अगर कुछ नहीं बदली तो पौन दर्जन गांवों के सैकड़ों भूमिहीन परिवारों की किस्मत। डेढ़ दशक की  मैराथन दौड़ के बावजूद तराई क्षेत्र के ये भूमिहीन परिवार 1171 एकड़ भूमि पर पट्टा आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने की बाट जोह रहे हैं। चुनाव के समय लगभग सभी इस समस्या के खात्मे का वादा भी करते रहे हैं, लेकिन हल किसी ने ढूंढने की कोशिश नहीं की। शासन से मामूली त्रुटि को दूर कराने के लिए ग्राम प्रधानों ने विधायक पीतमराम के साथ शासन स्तर तक दौड़ भाग भी की, लेकिन नतीजा सिफर रहा। तराई क्षेत्र के ग्राम पुरैना ताल्लुके महाराजपुर, मठइया लालपुर, रमनगरा, नगरिया खुर्दकलां, महाराजपुर, कंजिया सिंहपुर, बंदरबोझ व बूंदीभूड़ सहित पौन दर्जन गांवों में सिंचाई विभाग के शारदा सागर खंड ने जो भूमि शारदा सागर डैम बनने के बाद 1171 एकड़ बची अतिरिक्त भूमि को 1970 में राजस्व विभाग को कृषि कार्य के लिए भूमिहीनों में आवंटन के लिए ट्रांसफर कर दी थी। बताते है कि उस दौरान यह भूमि प्राथमिकता के तौर पर दलित भूमिहीनों को देने की बात कही गई थी। भूमि के राजस्व अभिलेखों में दाखिल खारिज होने के बाद जिला प्रशासन ने पट्टे करने की प्रक्रिया शुरू की। तत्कालीन डीएम कौशलराज शर्मा ने इसका सर्वे कराया। साथ ही उपरोक्त गांवों में जो भूमिहीन भूमि पर काबिज थे उन सहित पात्र लोगों की सूची बनाने को ग्राम पंचायतों में खुली बैठक कराई। इधर जब पात्रों की सूची बनी तो मामला तूल पकड़ने लगा। यह कहा गया कि भूमि दलितों को मिले। इसके बाद पट्टा आवंटन को लेकर बात बिगड़ने लगी। एक तो सभी जातियों के भूमिहीनों का भूमि पर कब्जा था, दूसरे प्रधानों का कहना था कि उनकी ग्राम पंचायत में जितने भूमिहीन दलित पात्र हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जाए। उसके बाद शेष अन्य जातियों को आवंटित की जाएगी। इस बीच राजस्व प्रशासन ने नया फरमान जारी किया। कहा कि जिन गांवों में दलित पात्र नहीं होंगे, वहां न्याय पंचायत स्तर से पात्रों की तलाश की जाएगी। इस पर कई ग्राम प्रधान हाईकोर्ट चले गए और पट्टा आवंटन की प्रक्रिया पर स्टे ले लिया। इधर ग्राम प्रधान आशा मिस्त्री, शंकर राय परितोष राय, प्रशांत शाना बताते हैं कि वो लोग पांच वर्षों से विधायक पीतमराम के साथ शासन स्तर पर दौड़भाग कर रहे हैं। राजस्व मंत्री, राजस्व परिषद के अध्यक्ष से भी भूमि की श्रेणी बदलवाने को मिल चुके हैं। इतनी लंबी दौड़भाग के बाद आश्वासन तो मिले, लेकिन नतीजा सिफर रहा। इसके चलते 1171 एकड़ भूमि पर काबिज भूमिहीन अभी तक पट्टों के हकदार नहीं हो सके हैं। 
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