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Pilibhit News: शारदा तट पर आस्था का संगम, कल्पवास को पहुंचे संत-महंत

Tue, 14 Jan 2025 12:21 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
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बाबा राघव दास।
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पूरनपुर। जिले में शारदा नदी के किनारे पर आस्था और अध्यात्म का संगम रमनगरिया सज गई है। पौष पूर्णिमा से संत-महंत और श्रद्धालुओं ने एक महीने का कल्पवास शुरू कर दिया है। भजन-कीर्तन और जयकारों की ध्वनि गूंजने लगी है। प्रवचन के स्वर भी सुनाई दे रहे हैं। नदी तट पर आठ महंतों के अपने अलग-अलग आश्रम बने हैं। कल्पवास के समय नदी तट पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने को खर-फूस की चार से नौ झोपड़ियां बनाई गई हैं।
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पूरनपुर क्षेत्र में शारदा नदी तट पर पौष पूर्णिमा से एक महीने की रमनगरिया बसाई जाती है। तट पर संत-महात्मा अपनी कुटिया बनाकर रहते हैं। अन्य श्रद्धालु भी नदी तट पर प्रवास और सत्संग करते हैं। कल्पवास को लेकर कई संत, महात्मा सप्ताह भर पहले ही शारदा नदी तट पर पहुंच गए थे। सोमवार को कल्पवास की सभी तैयारियां पूरी कर लीं। संतों ने अपने आसन लगा दिए हैं। संतों ने बाबा राघवदास के नेतृत्व में पिछले दिनों मुख्यमंंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा था।। शारदा नदी तट पर प्रकाश, सुरक्षा व्यवस्था, अस्थायी शौचालय, श्रद्धालुओं के नहाने और कपड़े बदलने का स्थान निर्धारित कराए जाने आदि की मांग की थी। एसडीएम अजीत प्रताप सिंह ने नौ जनवरी को पुलिस, वन, राजस्व विभाग के अफसरों के साथ नदी तट पर पहुंचकर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद घाट पर प्रकाश व्यवस्था के लिए जनरेटर की व्यवस्था की गई है। अस्थायी शौचालय, फायर ब्रिगेड टीम और पुलिस भी नदी तट पर पहुंच गई है।


छह फरवरी से शुरू होगा यज्ञ



पूरनपुर। शारदा नदी तट पर कल्पवास के दौरान पूजा-पाठ के साथ यज्ञ भी होता है। बाबा राघवदास ने बताया कि छह फरवरी से नदी तट पर यज्ञ शुरू होगा। 12 फरवरी को पूर्णाहुति के साथ विशाल भंडारा होगा। 13 फरवरी को परेवा है। 14 फरवरी को कल्पवास कर रहे संत, महात्मा अपने आश्रमों को रवाना होंगे।
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सालों से शारदा नदी पर कल्पवास करते आ रहे हैं। कल्पवास की तैयारी को लेकर चार जनवरी को ही नदी तट पर आ गए थे। प्रशासन ने मांग पर प्रकाश, सुरक्षा आदि की व्यवस्थाएं दुरुस्त की है। कल्पवास में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को रात में ठहरने की भी पूरी व्यवस्था की गई है। - बाबा राघवदास







40 साल से शारदा नदी तट पर कल्पवास को पहुंच रहे है। उनके गुरु और पूर्वज भी कल्पवास को नदी तट पर आते थे। एक महीने के कल्पवास के चलते नदी तट पर भक्तिमय माहौल रहता है। दूर-दराज से भी श्रद्धालु स्नान, पूजा को आते है।- वासुदेव महराज

बाबा राघव दास।

बाबा राघव दास।

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