पीलीभीत। बरेली-सितारगंज हाईवे निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण के बाद मुआवजा देने पर अधिकारियों के बदलने से भी फर्क पड़ा है। इसकी वजह से किसानों को मुआवजा देने में देरी हो रही है। दो बार एसडीएम, तहसीलदार और लेखपालों में बदलाव हो चुका है। इसकी वजह से नए अधिकारियों और कर्मचारियों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
अमरिया तहसील क्षेत्र के अंतर्गत बरेली-सितारगंज हाईवे प्रकरण में कई ढांचों का अब भी मूल्याकंन नहीं हो पाया है। लगातार हो रहे तबादलों के चलते नवनियुक्त अधिकारियों को फिर से फाइलों का अध्ययन करना पड़ रहा है। वहीं लेखपालों की तैनाती नए सिरे से होने की वजह से भी क्षेत्रों को जानने में समय लग रहा है।
कुछ लेखपाल प्रकरण में होने वाली कार्रवाई से भी डर रहे हैं। इसकी वजह से मूल्यांकन करने से पल्ला झाड़ ले रहे हैं। ऐसे में मुआवजे की फाइलें अधर में लटकी हुई हैं। किसान मुआवजे के लिए एसएएलओ के दफ्तर के चक्कर काटने को मजबूर हैं। किसानों को मुआवजे के नाम पर सिर्फ आश्वासन देकर लौटा दिया जा रहा है।
वहीं सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय में स्टॉफ की कमी भी इस कार्य की प्रगति में बाधा बनी हुई है। ऐसे में शेष किसानों के मुआवजे की फाइल कब तक आगे बढ़ पाएगी इसका जवाब अधिकारियों के पास भी नहीं है।
एसडीएम अभी नए आए हैं। जल्द ही फाइलों की अध्ययन कर भेजेंगे। इसके बाद मुआवजे की फाइल को आगे भेजा जाएगा।
-विजय वर्धन तोमर, एसएएलओ