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कमीशन के लिए बच्चों पर  लाद रहे किताबों का बोझ

Wed, 20 Apr 2016 11:52 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
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किताबें - फोटो : अलीगढ़/ब्यूरो
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प्राइवेट स्कूलों में हर साल नए एकेडमिक सेशन की शुरूआत में यूपी बोर्ड और सीबीएसई के प्रमुख विषयों की किताबों में कमीशन का खेल होता है। प्राइवेट स्कूल खासकर सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में निजी प्रकाशकों का खासा बोलबाला है। इन स्कूलों में नेशनल काउंसिल फार एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) के बजाए निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ाई जा रही हैं, जिसके चलते अभिभावकों की जेब पर कैंची चल रही है वहीं स्कूल/क़ालेज के प्रबंधतंत्र के साथ-साथ पुस्तक विक्रेताओं को भी मोटा कमीशन मिल रहा है।
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शहर में यूपी व सीबीएसई से संबद्ध करीब 20 स्कूल कॉलेज हैं। अप्रैल की शुरूआत होते ही निजी स्कूल प्रबंधन व निजी प्रकाशकों में कमीशन तय होना शुरू हो जाता है। जो निजी प्रकाशक ज्यादा कमीशन देगा, स्कूल में उसी प्रकाशन की किताबें पढ़ाई जाएंगी। इस कमीशनखोरी में अभिभावक खुद को लाचार महसूस कर रहे हैं। बानगी के तौर पर यदि कक्षा चार को ही देखें तो केंद्रीय विद्यालयों में कक्षा चार की चार किताबें हिंदी, अंग्रेजी, गणित व पर्यावरण अध्ययन पढ़ाई जाती हैं। एनसीईआरटी की इन चारों किताबों का मूल्य करीब 150 रुपये है। सीबीएसई से संबद्ध निजी स्कूलों में कक्षा चार में ही लगभग 15 किताबें चलती हैं और उनकी कीमत तीन से चार हजार रुपये के बीच होती है। कुल मिलाकर देखा जाए तो सीबीएसई से संबद्ध निजी स्कूल उसकी गाइड लाइन का मखौल उड़ा रहे हैं।

एनसीईआरटी के नियम दरकिनार
निजी स्कूलों में कक्षावार पाठ्यक्रम कैसा रहेगा और कौन सी किताबों से अध्यापन कराया जाएगा, यह फैसला नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग निर्धारित करती है, लेकिन कमीशन के खेल के चलते उसके सभी नियम दरकिनार कर दिए जा रहे हैं। 
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कक्षा एक, कीमत अलग
कक्षा    विषय        निजी प्रकाशक    एनसीईआरटी
छह    इंग्लिश    200            50
सात    मैथ        245            55
आठ    साइंस        300            50

बुक्स में होता है काफी अंतर
प्राइवेट पब्लिसर्स व एनसीईआरटी बुक्स में काफी अंतर होता है। वहीं जीके, ड्राइंग जैसी कई अन्य बुक्स एनसीईआरटी की नहीं आती हैं। मजबूरन पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए स्कूलों को इस तरह की पुस्तकें शामिल करनी पड़ती हैं।
- रवि शर्मा, पुस्तक विक्रेता  

एनसीएफ का रखा जाए ध्यान
राष्ट्रीय पाठ्यचर्चा की रूपरेखा (एनसीएफ) 2005 में बिना किसी दबाव शिक्षा की बात कही गई है। बच्चों पर बस्ते का बोझ कम हो, ताकि बच्चे शारीरिक एवं मानसिक दबाव महसूस न कर सकें और पढ़ाई में भी दिलचस्पी बनी रहे। 
- लक्ष्मीकांत शर्मा, वरिष्ठ प्रवक्ता

निजी प्रकाशकों की किताबें थोपना गलत
प्राइवेट स्कूल संचालकों को पत्र भेजकर अधिकृत प्रकाशकों की किताबों का संचालन करने को कहा गया था। निजी प्रकाशकों की किताबों को अभिभावकों पर थोपना गलत है। सदि ऐसा कही होता है, निश्वित ही उचित कार्रवाई की जाएगी।
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- जेके वर्मा, डीआईओएस
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