जरूरी काम का हवाला देने वाले भी नहीं हो सके पार
सीएम की सुरक्षा का हवाला देेकर रोका गया था ट्रैफिक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनपद आगमन पर शहर की सड़कों से लेकर हाईवे तक राहगीर फंसकर रह गए। सुरक्षा बंदोबस्त के नाम पर पुलिस ने लोगों को आगे बढ़ने नहीं दिया। खास बात रही कि जरूरी काम का हवाला देने वालों को भी खाकी की दुतकार सुननी पड़ी। मुख्यमंत्री तीन घंटे से अधिक समय जिले में रहे और इस बीच जहां-तहां रोके गए लोग परेशान होते रहे।
सीएम भले ही दोपहर करीब एक बजे पीलीभीत पहुंचे, लेकिन सड़कों पर बंदोबस्त सुबह से थे। शहर में मंडी समिति धान खरीद की हालत चेक करने पहुंचने के दौरान सीएम का काफिला जाम में न फंस सके, इसके लिए वाहनों को हाईवे पर ही रोक दिया गया था। ताकि शहर की बेपटरी यातायात व्यवस्था को छिपाकर सीएम को सब अच्छा सा दिखाया जा सके। बीसलपुर, पूरनपुर, बरेली हाईवे पर शहर के पीछे ही वाहनों की कतारें लगा दी गईं। इससे शहर को जाम से बचाने के अफसरों के मंसूबे तो एक हद तक कामयाब हो गए, लेकिन हाईवे पर जाम की समस्या काफी देर तक मुसीबत बनी रही। मंडी समिति में निरीक्षण के बाद वाहनों को छोड़ा गया। उधर चूका बीच में सीएम के पहुंचने को लेकर माधोटांडा क्षेत्र में भी हाईवे पर राहगीरों को परेशानी झेलनी पड़ी। पूरनपुर -खटीमा मार्ग पर लालकुआं पुल के पास सुबह सवा 11 बजे से वाहनों को रोक दिया गया। दुपहिया, चार पहिया के अलावा यात्री बसों तक को भी जाने नहीं दिया गया। इससे सफर एक मुसीबत बनकर रह गया। सीएम के चूका से निकलने पर तीन घंटे बाद लोगों को राहत मिल सकी। खास बात रही कि सुरक्षा के नाम पर पुलिसकर्मियों की दुत्कार लोगों को सुननी पड़ी। बनकटी, मंडी समिति रोड पर भी हालात जस के तस बने रहे।
राहगीर बोले, सुरक्षा के नाम पर मनमानी
बहन की शादी कर घर लौट रहे हैं। बच्चे बस में परेशान हो रहे हैं। सौ कदम की दूरी पर पानी लेने के लिए भी पुलिस ने जाने नहंीं दिया। मुख्यमंत्री का दौरा हमारे लिए तो मुसीबत बन गया।
मनोज खन्ना एडवोकेट, लखनऊ
परिवार के साथ देहरादून से आ रहे हैं। महिलाएं, बच्चे भूख से परेशान हैं। तीन घंटे से जाम में फंसे हैं, कोई सुध लेने वाला नहीं है। खाना लाने के लिए भी आगे नहीं जाने दिया जा रहा है।
गोविंद पाल, लखीमपुर खीरी
काफी देर से रोक कर रखा गया है। परिवार वाले खासकर बच्चे जाम में फंसकर रो-रोकर परेशान हैं। सीएम की सुरक्षा को लेकर अगर रोकना था तो किसी सही जगह चिन्हित करते। जंगल में रोक कर छोड़ दिया है।
नीरज सिंह, सीतापुर