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सिद्ध बाबा मेले में दखलंदाजी पर ग्रामीणों और वनकर्मियों में नोंक-झोंक

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द्धिबाबा स्थल पर ग्रामीणों और अफसरों के बीच होती बहस। - फोटो : PILIBHIT
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कलीनगर। सिद्धबाबा के प्रसिद्ध मेले में वन विभाग की आपत्तियों और आशंकाओं पर लोग भड़क गए। वनकर्मियों और आयोजन से जुड़े कुछ ग्रामीणों में नोकझोंक हुई। विवाद को निपटाने के लिए बरखेड़ा के विधायक स्वामी प्रवक्तानंद और पूरनपुर के विधायक बाबूराम पासवान पहुंचे तो पारंपरिक आयोजन जारी रखने का निर्णय लिया गया।
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माला रेंज के जंगल में सिद्धबाबा का मेला शुक्रवार से शुरू हो गया है। मेला 45 दिन चलेगा। मेले में हजारों लोग एकत्र हो रहे हैं। बड़ी संख्या में भंडारे होते हैं। छोटी-छोटी कई दुकानें भी लगती हैं। वाहनों की आवाजाही होती है। वनकर्मियों ने आशंका जताई कि इस दौरान वन्य जीवों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। जंगल की लकड़ी को भंडारे के लिए काटा जा सकता है। वनकर्मियों ने भंडारे कम से कम करने की बात की। इसे लेकर पाबंदियों की बात कही तो आयोजन से जुड़े कई ग्रामीण भड़क गए। उन्होंने कहा कि पारंपरिक आयोजन है। इसमें पाबंदियां सहन नहीं होंगी। इस पर विधायकों को हस्तक्षेप करना पड़ा। विधायकों की मौजूदगी में वनकर्मियों और रेंजर के साथ बैठक हुई। बैठक में वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मेले का आयोजन करने की बात आयोजन समिति की ओर से कही गई। तब कहीं विवाद समाप्त हुआ। तहसीलदार ध्रुव नारायण और माधोटांडा थाना प्रभारी गौरव बिश्नोई भी टीम के साथ पहुंचे थे।
पॉलिथीन का प्रयोग न करें तो रहेगा बेहतर
- विधायकों की मौजूदगी में ग्रामीण और अफसरों के बीच बातचीत में कहा गया कि जंगल क्षेत्र होने के चलते वन और वन्य जीवों की सुरक्षा बेहद जरूरी है। इसके लिए सावधानीपूर्वक भंडारे का आयोजन किया जाए। पॉलिथीन का प्रयोग न किया जाए तो बेहतर रहेगा। जंगल की लकड़ी का प्रयोग भी न हो।
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मेला आयोजन के दौरान पीटीआर के नियमों का भी पालन किया जाएगा। जंगल की लकड़ी और पॉलीथिन का प्रयोग न करने की बात कही गई है। इस पर आयोजकों ने सहमति दी है। - ध्रुव नारायण, तहसीलदार कलीनगर

विधायक की मौजूदगी में अफसरों और ग्रामीणों की होती बैठक।- फोटो : PILIBHIT

 

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