बारिश और ओलावृष्टि से फसल बर्बाद होने के बाद जिले में किसानों की मौत का
आंकड़ा भले ही बढ़ रहा है लेकिन प्रशासन इन मौतों को फसल बर्बादी से नहीं
मना रहा। शासन को अब तक 22 किसानों की मौत की सूची भेजी गई है जिसमें
बीमारी एवं स्वाभाविक मौत बताई गई है।
25 फरवरी को हुई ओलावृष्टि और
इसके बाद हुई बारिश से जिले में किसानों की फसलें तबाह हो गईं। प्रशासन की
रिपोर्ट पर पूरे जिले को आपदा प्रभावित घोषित कर दिया गया और किसानों को
राहत भी दी जा रही है, लेकिन नुकसान के बदले मिल रही राहत से किसानों का
भला नहीं हो रहा है। इस बीच कई किसानों की मौत की खबर आई है जिसमें घर
वालों के अनुसार फसल में हुए नुकसान के सदमे में मौत हुई है। समाचार पत्रों
में प्रकाशित हो रही इन खबरों पर प्रशासन से जांच कराकर बुधवार को शासन को
भेजा है। ओलावृष्टि से लेकर मंगलवार तक कुल 22 किसानों के मरने की सूचना
शासन को भेजी गई है इसमें एक भी किसान की मौत फसल नुकसान अथवा सदमे में
नहीं हुई है। रिपोर्ट के अनुसार छह किसान काफी वृद्ध थे जिनकी स्वाभाविक
मौत हुई जबकि 14 किसानों की मौत बीमारी से हुई है। दो किसानों की मौत
अत्याधिक नशा करने के कारण होना बताया गया है। प्रशासन का कहना है कि इसमें
मात्र एक किसान ने ही पोस्टमार्टम कराया था जिसके फेफड़ों में इंफेक्शन से
मौत होना आया है शेष ने तो पोस्टमार्टम तक नहीं कराया।
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जिले
में ओलावृष्टि के बाद से 22 किसानों की मौत हो गई जिनकी जांच के बाद
रिपोर्ट भेजी जा रही है। इसमें एक भी किसान की मौत फसल नुकसान और सदमे से
नहीं हुई है।
ओएन सिंह, डीएम