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आम बजट से महंगाई पर नियंत्रण और आयकर स्लैब में बदलाव की उम्मीद

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पीलीभीत। कोरोना संक्रमण से बिगड़ी अर्थव्यवस्था को आम बजट से आक्सीजन मिलने की उम्मीद है। ऐसा शायद पहली बार हो रहा है जब उद्यमी, कारोबारी और नौकरीपेशा के साथ आम लोगों की निगाहें विकास परियोजनाओं के बजाए सुधार के उन प्रयासों पर हैं, जिससे महंगाई कम होने के साथ प्रत्येक वर्ग को ऊपर उठने में मदद मिले और उनका जीवन खुशहाल हो सके। सोमवार एक फरवरी को आने वाले बजट में आम आदमी से लेकर कारोबारी महंगाई पर नियंत्रण की बात कह रहे हैं। वहीं कारोबारी और नौकरीपेशा आयकर स्लैब में बदलाव, शिक्षा व चिकित्सा के ढांचे में सुधार की उम्मीद जा रहे हैं। किसानों के लिए खेती में राहत और उद्यमियों को इस बजट में उद्योगों को जीवित करने के लिए बड़े पैकेज की आस लगी है।
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शिक्षा जगत को मिले विशेष पैकेज
शिक्षा जगत को बजट से बड़ी उम्मीदें हैं। शिक्षकों को वेतन पर टैक्स में छूट के साथ शिक्षा क्षेत्र को अन्य देशों की शिक्षा से बेहतर बनाने के लिए स्पेशल पैकेज दिए जाने की आस है। उनका कहना है कि सरकार कॉलेजों में रिसर्च और डेवलपमेंट पर ज्यादा ध्यान दें। इसके साथ ही अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए अप्रत्यक्ष करों की कटौती, महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में भी कुछ न कुछ बड़े बदलाव होने चाहिए।
बजट से बांसुरी उद्योग को आक्सीजन मिलने की संभावना
पीलीभीत। यहां के बांसुरी उद्योग को उम्मीद थी कि एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल होने के बाद बांसुरी कारीगरों के घरों में सिमटे इस छोटे से कुटीर उद्योग को फिर से नई पहचान मिलेगी, मगर योजना के दो साल बीतने के बाद बांसुरी कारीगरों की उम्मीद टूटती नजर आ रही है। वजह यह है कि जिम्मेदार सिर्फ ओडीओपी के लक्ष्यपूर्ति में लगे हैं। कई ऐसे बांसुरी कारीगरों ने बैंकों में ऋण के लिए आवेदन किया था, मगर इन कारीगरों को ऋण मिलना तो दूर इनको ऋण मिलेगा भी या नहीं, इसका भी पता नहीं। बांसुरी कारोबारियों के मुताबिक करीब ढाई दशक पहले जिले में बांसुरी कारोबारियों का करीब एक करोड़ रुपये के आसपास प्रति वर्ष टर्न ओवर था। अब यह घटकर 25-35 लाख रुपये ही रह गया है। बजट में उन्हें एक जिला एक उत्पाद योजना को लेकर कोई बड़ी राहत या पैकेज की आस है। अधिकांश बांसुरी कारोबारियों को कहना है कि ओडीओपी योजना के तहत बैंकों से मिलने वाले ऋण की प्रक्रिया आसान होनी चाहिए।
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किसान बोले: बाजार उपलब्ध हो और लाभकारी मूल्य मिले
पीलीभीत। आने वाले आम बजट से किसान बड़ी उम्मीद लगाए बैठे हैं। बजट से फसलों का लाभकारी मूल्य, पूर्ण माफी, किसान सम्मान निधि की धनराशि में बढ़ोत्तरी, फसल नुकसान, पैकेज, फसल बिक्री के लिए बाजार की उपलब्धता की आस है। किसानों का कहना है कि बाजार न होने से किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ती है। किसान सम्मान निधि देकर सरकार ने बेहतर काम किया, लेकिन अब इसकी धनराशि में बढ़ोत्तरी होनी चाहिए। जनपद के किसान धान, गेहूं और गन्ने के अलावा सब्जी फसलें, मेंथा, दालों का भी उत्पादन करता है, मगर किसानों के समक्ष बाजार उपलब्ध न होने की समस्या आड़े आती है। इसी वजह से किसानों को अपनी उपज का सही दाम नहीं मिलता और अन्य मुख्य फसलों का ही उत्पादन करने को विवश हैं।
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