पीलीभीत। सपा सरकार में पूर्व खाद्य रसद मंत्री रहे पार्टी के कद्दावर नेता हेमराज वर्मा और उनके भाइयों के खेत में पराली जलाने का मामला करीब तीन दिन पुराना है। गुपचुप तरीके से पराली जलाने के बाद उनके खेत की जुताई भी कर दी गई। गांव वाले पहले इसलिए खुलकर नहीं बोले कि मामला पूर्व मंत्री से जुड़ा था। इस मामले में कार्रवाई करने में भी हीलाहवाली बरती गई। हालांकि उच्चाधिकारियों तक मामला पहुंचने के बाद रिपोर्ट दर्ज कराई गई। उधर, पूर्व मंत्री ने कार्रवाई को राजनीतिक रंजिश में हुई कार्रवाई करार दिया।
न्यूरिया क्षेत्र के गांव टाह स्थित तीन एकड़ खेत में पराली जलाने की घटना को लेकर जब ग्रामीणों से बातचीत की गई तो पहले कोई भी गांव वाला खुलकर बोलने को तैयार नहीं था। मगर, जब उन्हें आश्वासन दिया गया कि उनका नाम गोपनीय रखा जाएगा तो नाम न छापने की शर्त पर गांव वालों ने बातचीत की। एक ग्रामीण ने बताया कि कि जिस तीन एकड़ खेत में पराली जली है, वह पूर्व मंत्री और उनके दो भाइयों का है। खेत में बीते तीन या चार दिन पहले गोपनीय तरीके से पराली जला दी गई थी। पराली जलाने का मामला प्रकाश में न आए, इसके लिए खेत में पानी भरकर उसकी जुताई भी करवा दी थी। राजस्व कर्मचारी और लेखपाल का पूर्व मंत्री के घर आना-जाना लगा रहता है। उन्हें सूचना भी मिल गई थी। मगर, लेखपाल कार्रवाई से बचते रहे। गांव वालों के अनुसार लेखपाल शुक्रवार की शाम गांव भी पहुंचे और खेत की फोटो-वीडियो बनाकर भी ले गए।
एक अन्य ग्रामीण के खेत में भी जलाई गई पराली
टाह गांव में पूर्व मंत्री के खेत के अलावा एक अन्य खेत में भी पराली जलाने की बात प्रकाश में आई है। इसकी सूचना मिलने पर शुक्रवार रात को लेखपाल ने वहां पर भी मौका मुआयना कर जानकारी जुटाई थी। मगर, पूर्व मंत्री को बचाने के मकसद से इस मामले में भी कार्रवाई दबा दी गई।
पूर्व मंत्री बोले...मेरे खिलाफ राजनीतिक साजिश
हालांकि, पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा का कहना है कि हमारी व्यस्तता के चलते पूरी खेती भांजा संभालता है। चार अक्तूबर को धान कटवाए गए थे। छह अक्तूबर को खेत की जुताई करा दी गई थी। जुताई के दौरान खेत में बचे पराली के अवशेषों को राजनीतिक साजिश के चलते कोई और जलाकर चला गया। मेरे भाई के द्वारा इस मामले की सूचना थाने में खुद ही शनिवार की सुबह दी गई थी। मेरा मानना है कि खेत में पराली नहीं जलाई जानी चाहिए क्योंकि इससे वातावरण प्रदूषित होता है।
बीते साल पुलिस अफसर के आवास पर जली थी पराली
पराली जलाने की घटनाएं रोकना प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। प्रशासन की सख्ती गरीब और मध्यमवर्गीय किसानों पर ही दिखाई देती है। रसूखदारों के लिए कोई नियम कायदे नहीं होते। बीते साल एक पुलिस अधिकारी के आवास में भी पराली जला दी गई थी। काफी शोर मचा, मगर उस पर कार्रवाई नहीं हुई थी।