पीलीभीत/पूरनपुर। पंचायत राज विभाग में एक करोड़ का कूड़ेदान घोटाला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि इसी विभाग में एक और घोटाले की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। जनपद की 720 ग्राम पंचायतों में थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर प्रधानों को खरीदने थे। मगर, इसकी सप्लाई एक ही कंपनी से बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए करा दी गई है।
47 लाख रुपये से अधिक के सामान की सप्लाई के लिए टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। कंपनी से सामान की सप्लाई दिलाकर अब प्रधानों को बिल भेजे गए हैं। प्रधान और सचिव असमंजस में हैं कि बगैर कुटेशन या टेंडर के वे इतनी बड़ी रकम का भुगतान कैसे करें और किस तरह से अभिलेखों में दर्शाएं, ताकि उनकी नौकरी भी सुरक्षित रहे और निजी कंपनी के भुगतान की फांस भी निकल जाए।
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए शासन ने जनपद की सभी 720 ग्राम पंचायतों में एक थर्मल स्कैनर और एक पल्स ऑक्सीमीटर खरीदे जाने के निर्देश दिए थे। यह ग्रामीण इलाकों में कोरोना के बढ़ते संकमण पर अंकुश लगाने के लिए किया गया है। शासनादेश के मुताबिक ये चिकित्सा उपकरण ग्राम पंचायतों को राज्य वित्त मद और केंद्रीय वित्त आयोग की धनराशि से खरीदकर निगरानी समिति को सौंपने थे। मगर चिकित्सा उपकरणों की खरीद प्रधानों से अलग-अलग न कराकर सभी को एक निजी कंपनी से करा दी गई। इससे प्रधानों में रोष भी है। अब तमाम प्रधानों को चिकित्सा उपकरण खरीद के बिल भेजकर पंचायत सचिवों को उसे भुगतान करने को कहा गया है। मगर, टेंडर या कुटेशन न होने से ब्लॉक स्तर पर इतनी बड़ी राशि के भुगतान के तरीके निकाले जा रहे हैं।
बिना टेंडर ही 47.21 लाख के बंटे उपकरण
प्रधानों का आरोप है कि चिकित्सा उपकरण आनन फानन में ब्लॉक स्तर से ग्राम पंचायतों में सप्लाई कर दिए गए। प्रत्येक ग्राम पंचायत को भेजे गए बिलों में प्रधान और सचिवों से जीएसटी सहित 6558 रुपये का बिल भुगतान करने को कहा गया है। यह धनराशि किस कंपनी के खाते में ट्रांसफर करनी है, उसका खाता नंबर भी भेजा गया है। अहम बात यह है कि सभी ग्राम पंचायतों में एक ही कंपनी द्वारा इतने बड़े पैमाने पर चिकित्सा उपकरणों की सप्लाई की गई है। 47.21 लाख रुपये के उपकरण खरीद में टेंडर प्रक्रिया न अपनाने से इसमें बड़े पैमाने पर गोलमाल की आशंका व्यक्त की जा रही है।
झंझट में फंसे पंचायत सचिव
ये चिकित्सा उपकरण किस माध्यम से खरीदे गए, इसकी जानकारी अधिकांश पंचायत सचिवों को नहीं है। बगैर कुटेशन और बिना टेंडर के इसका भुगतान किस तरह होगा। इसे लेकर अधिकांश पंचायत सचिव चिंतित है। उन्हें डर है कि कहीं ऐसा न हो कि बिना टेंडर भुगतान करने से वे आगे चलकर किसी जांच में फंस जाएंगे।
कूड़ेदान खरीद में भी एक करोड़ से अधिक का हुआ था घपला
शासन के निर्देश पर पिछले वर्षों में ग्राम पंचायतों को कूड़ेदान खरीदने के निर्देश दिए गए थे। इसमें अधिकांश ग्राम पंचायतों में कूड़ेदान की खरीद भी इसी तरह हुई थी। एक अपंजीकृत फर्म ने प्रधानों और सचिवों से मिलकर निर्धारित मानक के अनुरूप कूड़ेदान खरीदने की जगह कटे ड्रम रखवा दिए थे। जांच हुई तो घोटाले का खुलासा हुआ। इसमें कई प्रधान और सचिवों को रिकवरी और अन्य कार्रवाई की गई। तमाम से तो अब भी रिकवरी नहीं हो पाई।
शासन के निर्देश पर ग्राम पंचायतों को चिकित्सा उपकरण खरीद के निर्देश दिए गए थे। ग्राम पंचायत स्तर से ही इनकी खरीद हुई है। इसलिए टेंडर प्रक्रिया की जरूरत ही नहीं थी। -श्रीनिवास मिश्र, सीडीओ