पीलीभीत। जंगल से बाहर हिंसक वन्यजीवों की बढ़ रही चहलकदमी के चलते उनकी सुरक्षा भी विभाग के लिए चुनौती बनी हुई है। आपातकालीन स्थिति में संसाधनों की कमी के चलते वन्यजीवों का रेस्क्यू करने में कई प्रकार की बाधाएं आ रही है। इससे टाइगर रिजर्व के अफसरों ने रेस्क्यू के दौरान संसाधनों की कमी को पूरा करने के लिए 23 लाख रुपये का प्रस्ताव बाघ संरक्षण केंद्र को भेजा था। इसमें 15 लाख रुपये की मंजूरी मिल गई है। इसके बाद अब रेस्क्यू के दौरान आने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए एक वाहन (टाटा 407) को मॉडिफाई किया जा रहा है, जिसमें पिंजरा जाल के अलावा वन्य जीव को जरूरी उपचार देने का सामान सहित अन्य संसाधन भी शामिल किए जा रहे हैं।
पांच साल पूर्व जिले के जंगल को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिल गया था। उस समय ऐसा माना जा रहा था कि अन्य टाइगर रिजर्व की तरह यहां भी संसाधन मुहैया कराए जाएंगे। वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सफल प्रयास होंगे, लेकिन लंबा समय बीतने के बाद भी टाइगर रिजर्व में संसाधनों की कमी को पूरा नहीं किया जा सका। वही इसके साथ ही फील्ड स्टाफ की लंबे समय से चली आ रही कमी आज भी बरकरार है। टाइगर रिजर्व में तैनात फील्ड डायरेक्टर व डीएफओ सीमित संसाधन व स्टाफ के प्रयोग से ही जंगल और जानवरों की व्यवस्था को सुधारने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। इधर जंगल में बाघ के तेंदुए सहित वन्यजीवों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। शाकाहारी वन्यजीव जंगल से बाहर की ओर अधिक रुख कर रहे हैं। वहीं शिकार की तलाश में बाघ, तेंदुआ भी उनका पीछा कर आबादी के निकट पहुंच रहे हैं। लंबे समय तक आबादी के निकट हिंसक वन्यजीवों की मौजूदगी किसानों के लिए मुसीबत बन रही है। मानव वन्यजीव संघर्ष की बन रही स्थिति भी इसका कारण बनी हुई है। इधर आपातकालीन स्थिति में वन्यजीव का रेस्क्यू करने में भी विभाग के सामने कई प्रकार की बांधाएं आ रही है। इस को ध्यान में रखते हुए टाइगर रिजर्व के अफसरों ने 23 लाख का प्रस्ताव बनाकर बाघ संरक्षण केंद्र को भेजा था। इस पर 15 लाख रुपये की मंजूरी मिल गई है। इसके तहत रेस्क्यू के संसाधन जुटाए जा रहे हैं। इसमें टाटा 407 वाहन को मॉडिफाई कर उसमें जाल, पिंजरा व इलाज का सामान सहित अन्य संसाधनों को शामिल किया जा रहा है।डीएफओ नवीन खंडेलवाल ने बताया कि रेस्क्यू के दौरान उत्पन्न बाधाओं को दूर करने के लिए एक वाहन को मॉडिफाई किया जा रहा है। इसमें रेस्क्यू से संबंधित संसाधनों को शामिल किया जा रहा है। उम्मीद है कि रेस्क्यू करने में काफी आसानी होगी।