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साहब ! अगर शारदा पार कर फिर इधर आ गए हाथी तो मचाएंगे भारी तबाही

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पीलीभीत। शारदा नदी के पार उत्पात मचा रहे दो नेपाली हाथियों को खदेड़ने में फिलहाल अफसर भले ही संजीदा नहीं हो, लेकिन निगरानी में चूक विभाग के लिए भारी पड़ सकती है। ग्रामीणों को शक है कि यह वही हाथी हैं, जिन्होंने तीन महीना पहले पीलीभीत से लेकर बरेली और रामपुर तक जमकर उत्पात मचाया था। इन्हें काबू करने के लिए एक माह तक चले अभियान में प्रदेश भर के वन अफसर और एक्सपर्ट लगे थे। इसके बाद हाथियों को काबू में लेकर कड़ी दिक्कतों के बाद शारदा नदी पार कराके पुराने रास्ते की ओर खदेड़ा गया था। ऐसे में समय रहते रोकथाम नहीं की गई तो हाथी फिर नदी पार कर इधर आकर बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकते हैं।
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शारदा नदी के पार नेपाल की ओर से हाथियों की आमद होती रहती है, लेकिन घूमने का दायरा कम होने के चलते वह भटकने में मजबूर हो जाते है। मई की शुरुआत में दो हाथी शारदा नदी को पार कर शारदा डैम के रास्ते महोफ के जंगल में पहुंच गए थे। रात को जंगल से बाहर निकल अमरिया क्षेत्र की ओर निकल गए थे। एक दिन तक आबादी के निकट दहशत फैलाने के बाद हाथी बहेड़ी क्षेत्र की सीमा से होकर बरेली की ओर पहुंचे थे। जंगल हाथियों की आबादी क्षेत्र में सक्रियता बढ़ते ही वन विभाग में खलबली मच गई। हाथी भी उग्र होने लगे थे। स्थिति बिगड़ते देख प्रदेश भर के वन अफसरों की टीम काबू करने में जुटी। बंगाल और असम से एक्सपर्ट भी बुलाए गए। दुधवा से हाथियों को भी घेराबंदी के लिए मंगवा लिया गया। सक्रियता के चलते हाथी रामपुर की ओर बढ़ गए थे। इसके चलते अभियान में सफलता नहीं मिल पा रही थी। यही नहीं एक वन रक्षक समेत तीन लोगों ने जान भी गवा दी थी। जैसे तैसे हाथियों को बेहोश कर काबू में किया गया था। इसके बाद पुराने रास्ते में छोड़ने के लिए हाथियों को पुन: पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल में छोड़ा गया था। यहां सही से होश में न आने के चलते हाथी फिर भटक गए और एक हाथी रमनगरा क्षेत्र की आबादी में पहुंच गया था। अफसरों की नींद उड़ा, बंगाल के एक्सपर्ट मौके पर पहुंचे। 24 घंटे के प्रयासों के बाद पहले एक हाथी को शारदा नदी के पार खदेड़ने इसके बाद दूसरे को पुराने रास्ते की ओर खदेड़ा गया था। इधर एक बार फिर नेपाली हाथियों की सक्रियता बढ़ रही है। निगरानी में चूक कभी विभाग के लिए आफत बन सकती है। ग्रामीण भी हाथियों का स्वभाव देख काफी डरे हुए है।
नहीं की रोकथाम तो खतरें में पड़ जाएगी हाथियों की सुरक्षा
शारदा नदी के पार हाथियों की बढ़ रहे उत्पात के बावजूद वन अफसर गंभीर नहीं हो रहे है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि जहां ग्रामीण परेशान है, वहीं हाथियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। वजह यह है कि दो साल पूर्व हुई हाथी की मौत को टाइगर रिजर्व प्रशासन ने दलदल में फंसने से मौत मानी हो, लेकिन हालात संदिग्ध ही माने जा रहे थे। मौके पर पानी में खून भी बह रहा था। वह हाथी भी कई दिनों से क्षेत्र में चहलकदमी कर उत्पात मचा रहा था।
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