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साहब! लाखों खर्च करने के बाद भी लगा महीना..अब फिर हाथी बन गए मुसीबत

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पीलीभीत। शारदा नदी के पार नेपाली हाथियों का उत्पात बढ़ता जा रहा है। उनके स्वभाव को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि समय रहते अगर इनको काबू में नहीं लाया गया तो बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है। अभी कुछ माह पहले ही रास्ता भटककर टाइगर रिजर्व के रास्ते बरेली और रामपुर की सीमा में पहुंचे दो नेपाली हाथियों ने आतंक मचा दिया था। उनको वापस करने में शासन स्तर से लाखों रुपये खर्च किए गए थे। एक माह तक चले उत्पात के बाद उनको बमुश्किल कब्जे में किया जा सका और फिर वापसी की गई थी।
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टाइगर रिजर्व की बराही रेंज के अंतर्गत एक समय ऐसा था कि नेपाल सीमा तक साल के हरे भरे जंगल हुआ करते थे। खुली सीमा होने के चलते नेपाल के गैंडे, हाथी सहित अन्य वन्यजीव शारदा नदी के पार खुले रुप से विचरण करते थे। कॉरिडोर होने के कारण कई दिन तक क्षेत्र में वन्यजीव शरण लिए रहते थे। इधर, समय के साथ-साथ वन भूमि खेती में तब्दील हो गई और हाथियों का कॉरिडोर समाप्त हो गया। ऐसे में हाथी तो पहले की तरह अभी भी आ रहे हैं, लेकिन उनको कॉरिडोर नहीं मिल रहा। उनके लिए मात्र लग्गा भग्गा का जंगल बचा है। यही वजह है कि वह रात होते ही जंगल से बाहर निकलकर ढकिया ताल्लुके महाराजपुर, गोरख डिब्बी गांव की सीमा में पहुंच रहे हैं और उत्पात मचा रहे हैं। इस बार भी रोकथाम के नाम पर वन विभाग औपचारिकता निभा रहा है। बीती रात तो हाथियों ने किसानों की झोपड़ियां, अनाज व सौर ऊर्जा की प्लेटों को तहस नहस कर दिया। अब अगर ये हाथी भी भटककर जिले के बाहर अन्य जगहों पर पहुंच गए तो फिर से लाखों खर्च कर हल्ला मचेगा।
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