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अब देवाहुति गंगा के मायने नालों का गंदा पानी और मैला

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पीलीभीत। जिस देश की सभ्यता, संस्कृति, संस्कार सभी कुछ नदियों के तट पर विकसित हुए, वहां की अब हर छोटी बड़ी नदी मैला ढोने का साधन बनकर रह गई है। घरों से निकला गंदा पानी, कूड़ा या जो भी अनुपयोगी लगा, उसे नदी में बहा दिया। ऐसे हालात अमूमन हर जगह देखने को मिल सकते हैं। अपने शहर को ही लें तो यहां शायद ही किसी शहरवासी को पता होगा कि उसके शहर की देवाहुति गंगा के नाम से जानी जाने वाली देवहा नदी में गंदे पानी के कितने नाले गिरते हैं? अब इसका ही पता नहीं होगा तो इन नदियों को प्रदूषणमुक्त करने की सोच कैसे विकसित होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। चलिए हम बताते हैं कि शहर में गंदे पानी के छह छोटे-बड़े नाले देवहा नदी में गिरकर उसकी पवित्रता से बरसों से खिलवाड़ करते आ रहे हैं। इसे नदियों को दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि नदियों को प्रदूषणमुक्त करने की कवायद गोष्ठियों तक ही सीमित रही। अमर उजाला ने बृहस्पतिवार को देवाहुति गंगा का पड़ताल की तो तस्वीर कुछ यूं नजर आई।
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देवहा में गिरते हैं छह गंदे पानी के नाले
शहर में पानी निकास को 30 छोटे व बड़े नाले बनाए गए हैं। इसमें एक मुख्य नाला शाहजी मियां की दरगाह शरीफ के पास से लेकर लकड़ी मंडी तक बनाया गया है। इन नाले की लंबाई करीब साढ़े तीन किमी लंबी है। इस मुख्य नाले में अन्य छोटे नालों को जोड़ा गया है। इसके अलावा करीब छह अन्य ऐसे नाले हैं जो सीधे नदियों में गिरते है। शहर भर का गंदा पानी व अपशिष्ट इन्हीं 30 छोटे बड़े नालों के माध्यम से बिना शोधन किए ही देवहा नदी में बरसों से बहाया जा रहा है। गंदे पानी के साथ घरेलू व कारखानों का कूड़ा, प्लास्टिक कचरा, मेडिकल कचरा व अन्य अपशिष्ट नदियों में बहाकर उन्हें सालों से निरंतर प्रदूषित किया जा रहा है।
नदी की तलहटी में घाट की जगह कूड़े के ढेर
शहर के सभी 27 वार्डों का कूड़ा निकालकर अस्थाई खुले कचरा घरों में डाला जा रहा है। नगर पालिका के कचरा वाहन इस कूड़े को उठाकर देवहा नदी के तलहटी में बरसों से डालते हैं। पालिका प्रशासन के अनुमान के मुताबिक रोजाना शहर से करीब नौ टन कूड़ा निकलता है। सालों से डाले जा रहे इस कूड़े से देवहा नदी किनारे जहां लोगों के स्नान आदि की जगह होनी चाहिए, वहां कूड़े के ढेर लगे हुए हैं।
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देवहा नदी की राह में हो रही खेती
शहर में ब्रह्मचारी घाट के समीप ही देवहा और खकरा नदी का संगम होता है। ऐसे में यहां देवहा नदी एक बड़े भूभाग में बहती थी। सैकड़ों मीटर चौड़ाई में बहने वाली शारदा नदी अब सिकुड़ती जा रही है। नदी द्वारा छोड़ी गई जमीन पर लोगों ने गन्ने के अलावा सब्जी की फसलें लगानी शुरू कर दी गई है। ऐसे में नदी का स्वरूप ही बदलता जा रहा है। वहीं कुछ स्थानों पर लोग धीरे-धीरे नदी की जमीन पर कब्जा करते जा रहे हैं। हालात ऐसे ही रहे तो वह दिन दूर नहीं जब यह सदानीरा विलुप्त हो जाएगी।
नदियों को प्रदूषणमुक्त करना बेहद जरूरी है। प्रदूषित नदियों में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा कम होने से जलीय जीवजंतुओं की मौतें हो रही हैं। खास बात यह है कि इससे भूगर्भ जल भी बड़े पैमाने पर प्रदूषित हो रहा है। जो भविष्य के लिहाज से मानव जीवन के लिए बेहद घातक है। - डॉ. एसके शर्मा, पूर्व प्राचार्य, उपाधि महाविद्यालय
देश में नदी घाटों को सजाया संवारा जा रहा है, लेकिन जिले में नदी के अस्तित्व के साथ ही खिलवाड़ किया जा रहा है। आस्था के साथ खिलवाड़ होता देख लोगों ने यहां आना ही बंद कर दिया है। एक समय था जब स्नान पर्वों पर देवहा के तट पूजा-अर्चना के स्वरों से गुंजायमान रहते थे। - श्रीकांत त्रिपाठी, मोहल्ला मोहतशिम खां
यह सच है कि नदी में गंदे पानी के नाले गिराए जा रहे हैं। इस मामले में अन्य जानकारियां जुटाने के बाद मामले को आगे बढ़ाया जाएगा। शासन स्तर से भी नदी को अतिक्रमण मुक्त कराने और उसकी पवित्रता को बरकरार रखने के लिए ठोस कदम उठाने के प्रयास कराए जाएंगे। -राकेश गुप्ता, जिलाध्यक्ष, भाजपा
शहर के लिए कोई ट्रंचिंग ग्राउंड न होने की वजह से देवहा नदी की तलहटी में बरसों से कूड़ा जा रहा था। अब कूड़ा डालने पर पाबंदी लगा दी गई है। अब अगर कोई कर्मचारी देवहा की तलहटी में कूड़ा डालेगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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- विमला जायसवाल, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद
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