पीलीभीत। बराही रेंज के जंगल में एक माह पूर्व जंगल सीमा पर खाई में एक नर तेंदुए का शव मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार तेंदुए की मौत गर्दन की नस डेमेज होने से हुई थी। इससे अधिकारी आपसी संघर्ष में तेंदुए की मौत होने का दावा कर रहे हैं। अफसरों ने घटना से जुड़े साक्ष्य जुटाने के लिए जांच एसडीओ पूरनपुर को सौंपी थी। करीब एक माह बीतने के बाद भी न तो तेंदुए से संघर्ष में घायल हुए दूसरे जानवर का पता चल सका है और न ही विभागीय जांच पूरी हो सकी है। जबकि वन्यजीव विशेषज्ञ तेंदुए की मौत को शिकारियों की करतूत बता रहे हैं।
टाइगर रिजर्व की बराही रेंज की नवदिया बीट के जंगल सीमा पर तारफेंसिंग के निकट खाई में करीब एक माह पूर्व नर तेंदुए का शव मिला था। घटना स्थल पर तेंदुए के शरीर में गर्दन व पैर में मामूली चोट के निशान पाए गए थे। इसके अलावा आसपास कोई साक्ष्य नहीं थे। किसान की सूचना पर पहुंचे वन अफसरों ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गर्दन में किसी हिंसक वन्यजीव के दांत लगे होने से वन्यजीव संघर्ष की बात कही गई थी। सांस रुकने से तेंदुए की मौत होने का पोस्टमार्टम में खुलासा किया गया था। हालांकि घटना स्थल पर मिले साक्ष्य संघर्ष की कहानी से मेल नहीं खा रहे हैं।
डीएफओ नवीन खंडेलवाल के निर्देश पर बराही के स्टाफ ने घटना स्थल से एक किमी के दायरे में जंगल व बाहर के क्षेत्र में कांबिंग भी की, लेकिन किसी भी घायल वन्यजीव की कोई लोकेशन व साक्ष्य नहीं मिल सके। इसके बाद दूरी का दायरा बढ़ाया तलाश कराने के साथ घटना स्थल पर भी चार कैमरें भी लगाए गए थे। वहीं घटना की हकीकत जानने के लिए एसडीओ माला उमेश राय को जांच सौंपी गई थी। इधर एक माह बीतने के बाद घटना स्थल से लेकर पांच किमी दायरे में कहीं भी हमलावर वन्यजीव की कोई लोकेशन व साक्ष्य विभाग नहीं जुटा पाया है। न ही जांच पूरी हो सकी है। अफसर जांच का इंतजार कर रहे हैं।
तेंदुए की मौत के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आपसी संघर्ष की बात साफ हो गई थी। हालांकि हकीकत जानने के लिए एसडीओ माला को जांच सौंपी गई थी। अभी जांच रिपोर्ट नहीं मिल है। कैमरों में भी कोई वन्यजीव ट्रेस नहीं हो सका है।
- नवीन खंडेलवाल, डीएफओ, पीलीभीत टाइगर रिजर्व