पीलीभीत। इसे सिस्टम की लापरवाही कहें या कुछ और। अनुशासनहीनता के आरोप में करीब तीन साल पहले निलंबित शिक्षा स्वास्थ्य अधिकारी (एचईओ) धीरेंद्र सिंह पर शिकंजा कसने में अफसर नाकाम रहे हैं। आलम यह है कि जिला अस्पताल में आवंटित सरकारी आवास खाली कराने के साथ ही उनसे सरकारी वाहन भी वापस नहीं लिया जा सका है। खास बात तो ये है कि प्रकरण संज्ञान में आने पर खुद विशेष सचिव मानवेंद्र सिंह ने इसे गंभीरता से लेते हुए महानिदेशक परिवार कल्याण से नाराजगी जताते हुए तत्काल एचईओ के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन आवास खाली कराने का मामला अफसरों की लापरवाही से अब तक अधर में लटका है।
स्वास्थ्य विभाग में एचईओ के पद पर तैनात रहे धीरेंद्र सिंह का 2015 में रामपुर तबादला किया गया था। उनको रिलीव भी कर दिया गया। रामपुर में ज्वाइनिंग के बावजूद जब धीरेंद्र सिंह ने सरकारी आवास नहीं छोड़ा और करीब आठ साल पूर्व मिली गाड़ी पर भी कब्जा जमाए रहे तो इसे लेकर शिकायत हुईं, तब धीरेंद्र सिंह को अफसरों की ओर से सख्त निर्देश दिए गए लेकिन इसका पालन नहीं किया। इसे अनुशासनहीनता मानते हुए 30 मार्च, 2016 को उन्हें निलंबित कर एडी मुरादाबाद कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया। हालांकि धीरेंद्र सिंह ने वहां भी ज्वाइन नहीं किया। इसका संज्ञान लेकर एडी मुरादाबाद डॉ. ज्ञान सिंह ने वेतन रोकने के साथ ही धीरेंद्र सिंह से पीलीभीत का सरकारी आवास खाली कराने और सरकारी गाड़ी वापस लेने के आदेश कर दिए। इधर, पूर्व में विशेष सचिव मानवेंद्र सिंह ने भी परिवार कल्याण के महानिदेशक को एक पत्र लिखा। इसमें आवास और सरकारी वाहन आवंटित करने वाले अधिकारी का जवाब तलब कर कार्रवाई की बात कही थी। इस बीच धीरेंद्र के कब्जे वाली गाड़ी का एक पहिया भी चोरी हो गया ।
सरकार को लग चुका है करीब आठ लाख का चूना
नियमानुसार ट्रांसफर होने के एक महीने के अंदर सरकारी आवास खाली कर देना चाहिए। वरना हर तीसरे माह से मानक का तीन गुना किराया वसूलने का प्रावधान है। टाइप-4 के जिस आवास पर धीरेंद्र का कब्जा है, उसका एक माह का किराया करीब छह हजार रुपये है। इस हिसाब से अब तक करीब आठ लाख रुपये किराया बकाया हो चुका है।
नोटिस देने के बाद भी खाली नहीं किया सरकारी आवास
पीलीभीत। निलंबित स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी धीरेंद्र सिंह के सरकारी आवास खाली न करने पर एक मई 2019 को मंडलायुक्त से शिकायत की गई थी। चार मई को जिला महिला अस्पताल की सीएमएस ने धीरेंद्र को नोटिस जारी किया। इसमें कहा गया कि वह नोटिस प्राप्ति के एक सप्ताह के भीतर बिजली और अन्य देयों का भुगतान कर आवास खाली कर दें। अन्यथा बलपूर्वक आवास खाली करा लिया जाएगा, लेकिन सीएमएस चार महीने बाद भी इस पर अमल नहीं कर सकी हैं।
बर्खास्त डीपीएम का भी है सरकारी आवास पर कब्जा
पीलीभीत। एनएचएम के जिला कार्यक्रम प्रबंधक सर्वेश वर्मा विभिन्न अनियमितताओं में सेवाएं समाप्त हो जाने के बावजूद जिला महिला अस्पताल के सरकारी आवास पर कब्जा जमाए हैं। सीएमएस ने 24 अगस्त को इस बाबत पत्र भेजकर सीएमओ से जानकारी मांगी थी। सीएमओ ने अगले दिन ही उन्हें सर्वेश वर्मा की सेवाएं समाप्त होने की सूचना भेज दी, लेकिन उनसे आवास अब तक खाली नहीं कराया जा सका है।
निलंबित एचईओ से सरकारी आवास खाली करने के लिए लगातार कहा जा रहा है। कमिश्नर और सीएमओ को भी पत्र लिखा जा चुका है। पिछले दिनों डीएम के समक्ष भी यह मुद्दा उठाया था, लेकिन स्थिति जस की तस है।
- डॉ. अनीता चौरसिया, सीएमएस
मैं नियमानुसार सरकारी आवास में रह रहा हूं। अगर गलत हूं तो मेरे खिलाफ कार्रवाई करने से अफसर क्यों कतरा रहे हैं। शासन स्तर पर भी इसको लेकर लगातार पत्राचार चल रहा है।
- धीरेंद्र सिंह, निलंबित एचईओ