पीलीभीत। जिले में आयुष्मान कार्ड जारी करने में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की बात सामने आई है। कई नेताओं, उद्योगपतियों, डॉक्टरों और पेट्रोल पंप मालिकों के कार्ड बन गए, जबकि वास्तविक रूप से जो गरीब हैं और अपना इलाज कराने में अक्षम हैं, वे आज भी कार्ड के लिए भटक रहे हैं। ऐसा नहीं है कि योजना से जुड़े अफसरों को इसका पता नहीं लेकिन इस संबंध में कार्रवाई नहीं की गई।
गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले मरीजों की जान उपचार के अभाव में न जाए। शासन की ओर से ऐसे मरीजों के उपचार के लिए आयुष्मान भारत योजना शुरू की गई। इस योजना के तहत जनपद के करीब पौन दो लाख गरीब परिवारों के मुखिया और उनके सदस्यों को शामिल किया गया साथ ही इनके लिए पांच लाख रुपये तक सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में कैशलेस उपचार की व्यवस्था की गई। पिछले साल प्रधानमंत्री ने योजना का शुभारंभ किया, लेकिन इसमें कुछ रसूखदारों ने सेंध लगा दी। जो वास्तविक रूप से गरीब हैं और योजना के हकदार हैं वह वंचित रह गए। वह अफसरों के आज भी चक्कर लगा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कुछ नेताओं, उद्योगपतियों, डॉक्टरों और पेट्रोल पंप मालिकों के आसानी से आयुष्मान कार्ड बना दिए गए। एक भाजपा नेता जिनका स्कूल है और पूरनपुरमें एक पेट्रोल पंप भी है का आयुष्मान कार्ड बनाए जाने की चर्चा तो जोरों पर रही।
आयुष्मान कार्ड से एक लाख गरीब अब भी दूर
पीलीभीत। करीब एक साल पहले हर गरीब को निशुल्क इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू हुई आयुष्मान योजना अफसरों की सुस्ती के कारण हीलाहवाली का शिकार हो गई है। जनपद के करीब एक लाख पात्र परिवार अब भी गोल्डन कार्ड से वंचित हैं। एक साल में महज 74 हजार के करीब परिवारों को गोल्डन कार्ड दिए जा सके। जिसमें करीब तीन हजार मरीजों ने आयुष्मान योजना का लाभ लिया है।
पड़ोसी युवक के पथरी ऑपरेशन कराने गांधी स्टेडियम रोड स्थित निजी अस्पताल पहुंचे तो आयुष्मान योजना लाभार्थी होने का पता चलते ही डॉक्टर ने गंभीर बीमारी बताकर भर्ती करने से इंकार कर बरेली जाने की सलाह देे दी।
-मनोज, एकता नगर
निमोनिया होने पर पहले जिला अस्पताल गए। डॉक्टर ने बिना किसी चेकअप के हालत नाजुक बताकर लखनऊ जाने की सलह दे दी। ऐसे में भला आयुष्मान योजना का फायदा जपदन में कैसे मिलेेगा।
-गौरव, पूरनपुर
करीम उल्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री की आयुष्मान भारत योजना गरीबों के लिए छलावा बनी हुई है। गोल्डन कार्ड के लिए जिला अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ते हैं। वहीं दूसरे तरफ जो अपात्र है उनके आसानी से कार्ड जारी कर दिए गए हैं। यह नाइंसाफी है।
बिलसंडा के आशिक ने कहा कि बीपीएल कार्ड होने के बाद भी उनको योजना से वंचित रखा गया है। जबकि कई ऐसे लोग जिनके पास कार, ट्रैक्टर ट्रॉली आदि हैं उनका नाम भी योजना में शामिल कर दिया गया है। अफसर इसको लेकर बिल्कुल गंभीर नहीं है।
बेस लाइन सर्वे के आधार पर लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए थे। कुछ अपात्रों के कार्ड जारी होने का मामला पूर्व में चर्चा में आया था, लेकिन कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई। लिहाजा, ऐसे लोगों को चिह्नित करने के लिए सर्वे कराया जा रहा है।
-डॉ. अश्वनी गुप्ता, नोडल अधिकारी आयुष्मान