पूरनपुर (पीलीभीत)। स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही के बाद जांच के नाम पर नया फंडा अपनाया जाने लगा है। प्रयास कर किसी तरह से पीड़ित पक्ष की वीडियो रिकार्डिंग कर मामलों को रफा-दफा किया जा रहा है। तीन अगस्त को स्ट्रेचर न मिलने पर ठेले पर महिला के प्रसव और सात अगस्त को सीएचसी में प्रसव कक्ष के बाहर गैलरी में ठेले पर महिला का प्रसव होने के मामले में अब तक यही हुआ है। प्रसव के बाद रेफर की गई शेरपुरकलां की रानी की मौत के मामले में भी सुविधा शुल्क मांगने की शिकायत न करने का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया गया।
प्रसव पीड़ा के चलते तीन अगस्त को रात साढ़े नौ बजे सीएचसी लाई गई मोहल्ला खानकाह निवासी रेफामीर की पत्नी खालिदा को स्ट्रेचर नहीं मिला था। उसने सीएचसी के बरामदे में ठेले पर ही शिशु का जन्म दिया। सात अगस्त को सुबह करीब साढ़े दस बजे पूरनपुर अहमदनगर निवासी अकील की पत्नी कमरजहां को प्रसव पीड़ा होने पर ठेले पर सीएचसी लाया गया। उसके ठेले को प्रसव कक्ष के बाहर गैलरी में रोक दिया गया। वजह यह थी कि प्रसव कक्ष में दूसरी महिला का प्रसव हो रहा था। कमरजहां ने गैलरी में ही ठेले पर शिशु का जन्म दिया था। ठेले पर सीएचसी में प्रसव होने की घटनाओं को स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने गंभीरता से लेकर जांच के आदेश दिए, लेकिन इससे पहले ही जांच में कार्रवाई से बचने को नया फंडा इजाद करते हुए दोनों पीड़ितों की रिकार्डिंग और वीडियो क्लिप मोबाइल में बना ली गई। खालिदा के ससुर से पक्ष में बयान देने के लिए महिला चिकित्सालय कॉलोनी में रहने वाले कर्मचारी से दबाव डलवाया गया। इसके बाद मोबाइल मेें बयान रिकार्ड कर लिया गया। कमरजहां के पति को उसके बच्चे और पत्नी का इलाज सीएचसी में होने और अस्पताल कर्मियों से संबंध न खराब करने का झांसा देकर उसकी वीडियो रिकार्डिंग मोबाइल में सेफ कर ली गई, ताकि उच्च स्तरीय जांच होने पर वीडियो रिकार्डिंग दिखाकर कार्रवाई से बचा जा सके।
प्रसव के बाद हालत खराब होने पर इलाज के दौरान बरेली में शेरपुरकलां के इमरान की पत्नी रानी बी की मौत के मामले में पहले से ही विभागीय कर्मचारी सतर्क थे। शेरपुरकलां के प्रधानपति की शिकायत पर पीड़ित को सहायता दिलवाने का झांसा देकर उसके ससुर को एक दिन पहले सीएचसी बुलाया गया। सुविधा शुल्क की शिकायत न करने की बात कहकर उसकी भी रिकार्डिंग मोबाइल में सेव कर ली गई। लापरवाही के बाद कार्रवाई से बचने को स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की ओर से अपनाया जा रहा नया फंडा अधिकांश कर्मचारियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। अगर कायदे से जांच की जाए तो सीएचसी के कई कर्मचारियों पर गाज गिरना तय है।
खालिदा का प्रसव बरामदे में ठेले पर होने पर जांच में किसी कर्मचारी की लापरवाही नहीं निकली, उसके ससुर की रिकार्डिंग है। कमरजहां को भी देर से सीएचसी लाया गया था। उसने ठेले पर शिशु को जन्म दिया। इसमें भी किसी की गलती जांच में नहीं मिली। उसकी भी वीडियो रिकार्डिंग है। रानी बी की मौत के मामले की जांच में भी गलत इंजेक्शन लगाने की पुष्टि नहीं हुई। सुविधा शुल्क मांगने की शिकायत उसने नहीं की। इसकी रिकार्डिग मेरे पास है।
-डॉ. सीपी सिंह, एमओआईसी