माधोटांडा/पीलीभीत। सोमवार रात शारदा नदी के जलस्तर में अचानक हुई बढ़ोत्तरी अब कम होने लगी है। जलस्तर बढ़ने से गभिया सहराई के कुछ घरों में पानी घुस गया था। नदी के तेज बहाव सेे अस्थाई बाढ़ नियंत्रण कार्य भी ध्वस्त हो गए थे। इधर, मंगलवार देर शाम से शारदा नदी का जलस्तर घटने लगा है। नदी में पानी का डिस्चार्ज 86 हजार क्यूसेक से घटकर 55 हजार के करीब पहुंच गया है।
शारदा नदी को नेपाल में महाकाली के नाम से जाना जाता है। जनपद सीमा में इंडो नेपाल बॉर्डर के नोमैंस लैंड से नदी भारतीय क्षेत्र में प्रेवश करती है। पिछले वर्षों की बात करें तो जनपद सीमा में प्रवेश करने के बाद शारदा नदी ने काफी भूकटान किया था। जिसमें आबादी क्षेत्र के साथ कृषि भूमि का काफी भाग कट गया था। स्थिति बिगड़ती देख तत्कालीन सपा सरकार ने नोमेंस लैंड से लेकर सनेडी तटबंध तक जियो ट्यूब व आरबीएम भर कर एक मजबूत बांध बनाया था। प्रयास भी सफल रहे। यह इलाका पूरी तरह सुरक्षित हो गया था। हालांकि इसके आगे गभिया सहराई, नलडेंगा, रमनगरा समेत अन्य गांव की सीमा में नदी कटान करती आ रही है। इस इलाके को सुरक्षित करने के लिए बाढ़ खंड ने बरसात से पूर्व सात प्रोजेक्ट भेजे, लेकिन दस करोड़ की लागत का मात्र एक ही प्रोजेक्ट मंजूर हो सका। इस लागत से शारदा डैम के सामने रमनगरा क्षेत्र में काम तो कराए गए, लेकिन ठेकेदारों की मनमानी हावी दिखाई दी।
वर्ष 1989 में भीषण बाढ़ से हुई थी भारी तबाही
वर्ष 1989 में शारदा नदी में भीषण बाढ़ आई थी। जिससे शारदा सागर डैम के सामने कई पत्थर की ठोकरें नदी में समा गई थी। नदी ने अपने बाएं किनारे की ओर नेपाल सीमा तक भूकटान तेज किया था और बाएं किनारे पर बसी ढकिया ताल्लुके महाराजपुर, रमनगरा, गुन्हान समेत कई गांवों की आबादी का क्षेत्र और हजारों एकड़ कृषि भूमि को अपने गर्भ में समेट लिया था। जिसके बाद सैकड़ों बाढ़ पीड़ितों ने शारदा डैम के वर्जित क्षेत्र में बस गए थे।
नदी की अधिक चौड़ाई होने से खतरा कम
शारदा नदी में हर साल बाढ़ तो आती है, लेकिन शारदा डैम के सामने नदी की चौड़ाई करीब दो से तीन किमी तक हो जाने के चलते खतरा कम रहता है। तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी होने पर ओवरफ्लो का खतरा बनता है, लेकिन नदी का जलस्तर घटते ही भूकटान की स्थिति बढ़ जाती है। इसके अलावा बाढ़ नियंत्रण कार्यों को भी क्षति होती है।
शारदा नदी का जलस्तर कम हो गया है। क्षेत्र में कटान की कोई स्थिति नहीं है। जहां कुछ नुकसान हुआ है, अस्थाई कार्य कराकर मरम्मत कराई जा रही है। ध्रुव नारायण शुक्ला, सहायक अभियंता, बाढ़ खंड