पीलीभीत। बहनजी क्या बीमारी है बताओ, डॉक्टर साहब तो हैं नहीं मैं ही दवा दे देता हूं। भैया मुझे तो पहले डॉक्टर को दिखाना है। ऐसे दवाई लेनी होती तो बाहर मेडिकल स्टोर से ही बीमारी बताकर ले लेती, बीस किलोमीटर चलकर क्यों आती। यह बेबसी है जिला अस्पताल में मरीजों की। दोपहर करीब 12 बजे कई डॉक्टर ओपीडी से गायब थे। फार्मेसिस्ट बीमारी पूछ-पूछ कर दवा देकर मरीजों को घर भेज रहे थे। ऐेसे में भला रोगियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा कहां से मिलेंगी। यह स्थिति अक्सर रहती है। मरीज आते हैं, घंटों इंतजार करते हैं और बिना डॉक्टरों को दिखाए लौट जाते हैं।
बदलते मौसम के साथ बीमारियों ने जकड़ना शुरू कर दिया है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन की ओपीडी 1500 के करीब पहुंच रही है, लेकिन मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को लाभ मिले इसको लेकर अफसर गंभीर नहीं हैं। मंगलवार को अस्पताल मेें अंदर से लेकर बाहर तक मरीजों की भीड़ थी। ईएनटी, बाल रोग विशेषज्ञ, एनआरसी प्रभारी आदि ओपीडी कक्ष से गायब थे। फार्मासिस्ट और अन्य कर्मी मरीजों को दवा लिखते दिखे। किसी डॉक्टर के कोर्ट एविडेंस में जाने तो किसी के अभी ही ओपीडी से उठकर जाने की बात कही जा रही थी।
बिजली ने भी खूब रुलाया
दोपहर करीब 12 बजे के लगभग जिला अस्पताल में बिजली चली जाने से चिकित्सकों के साथ मरीज व अन्य कर्मी परेशान दिखे। जनरेटर करीब पंद्रह मिनट बाद चला तब कही जानकार लोगों ने राहत महसूस की। सीएमएस का कहना था कि लाइट जाने के बाद तुरंत ही जनरेटर चलवा दिया गया था। जबकि उनके ही विभाग के कर्मी सीएमएस की बात को नकारते दिखे।
अमरिया के छोटेलाल ने बताया कि उनके बेटे की तबीयत खराब है। करीब सवा घंटा इंतजार करने के बाद भी जब डॉक्टर नहीं आए तो लौटना पड़ रहा है।
गनेशपुर गौंटिया से अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचीं विमला देवी का कहना था कि सात किलोमीटर की दूरी तय कर आई हैं, लेकिन डॉक्टर नहीं मिले। मजबूरी में निजी नर्सिंग होम में जाना पड़ेगा।
मझौला निवासी हरीश कुमार बच्चे को दिखाने के साथ ही अपनी दवा लेने पहुंचे थे। उन्हें तो दवा तो मिल गई लेकिन दो घंटे बाद भी ओपीडी कक्ष में डॉक्टर नहीं मिले, इससे बच्चे को नहीं दिखा सके।
शहर से सटे गांव हिम्मतनगर निवासी भगवानदेई ने बताया कि अस्पताल में मरीजों की कोई सुनवाई नहीं है। बाल रोग विशेषज्ञ कब आएंगे स्टाफ कर्मी से जानकारी चाही तो संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
जेनरेटर की सुविधा हर वक्त है। दोपहर में लाइट जाने का पता चलते ही जेनरेटर चला दिया गया था। डॉक्टर कम होने के बाद भी मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
- डॉ. रतनपाल सिंह सुमन, सीएमएस