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देर से सही, मगर, दरिंदों की फांसी से ही होगा निर्भया का इंसाफ

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पीलीभीत। राजधानी दिल्ली में सात साल पहले बिटिया निर्भया की जान लेने वाले पांच दरिंदों में से दो विनय शर्मा और मुकेश कुमार की क्यूरेटिव पिटीशन सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के बाद अब 22 जनवरी को चार गुनहगारों को फांसी दिए जाने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका जरूर एक रास्ता बचा है, मगर दया मिलने की संभावना न के बराबर ही है। गुनहगारों को फांसी की सजा बरकरार रखने पर बुद्धिजीवियों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सराहा है। सभी ने एक स्वर में कहा कि भले ही इतनी देरी लगी, मगर निर्भया को अब इंसाफ मिलकर रहेगा। ऐेसे दरिंदों को मौत से कम सजा होना ही नहीं चाहिए।
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यत्र नार्यस्तु रमंते तत्र देवता, जिस देश में नारियों की पूजा होती है, वहां ऐसी दरिंदगी करने वालों को सख्त सजा मिलनी ही चाहिए। निर्भया कांड के दोषियों की याचिका निरस्त होने से फांसी देने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। - एसआर गंगवार नरेश, अधिवक्ता
कई सालों से निर्भया कांड की सुनवाई चल रही थी। कानूनों में परिवर्तन की जरूरत है। फांसी की सजा मिलने के बाद बार-बार दया याचिकाओं पर रोक लगनी चाहिए। इससे न्याय मिलने में बाधा होती है। याचिका खारिज होने से अब निर्भया को न्याय मिलेगा। - गोवर्धनलाल वर्मा, अधिवक्ता
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कई चरणों की लंबी सुनवाई के चलते पीड़ित पक्ष भी पैरवी करते थक जाता है। अब ऐसा लग रहा है कि कहीं से भी फांसी पर रोक संबंधी आदेश जारी नहीं होगा और दोषियों की फांसी तय है। - तेज सिंह वर्मा, अधिवक्ता
कानूनी पेचीदगियों के चलते कई बार आरोपियों को दंड मिलने में समय लगता है। बदलते दौर में इसमें परिवर्तन की जरूरत है। याचिका खारिज होने के बाद अब उनके गुनाह की सजा मिलने में कोई बाधा नहीं रह गई। - अल्का शुक्ला, गृहणी
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